जल्द ही 964 घरों को उजाड़ेगी सरकार

देहरादून(आरएनएस)। कालागढ़ बांध परियोजना की उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की कलोनी में अवैध रूप से रह रहे 964 परिवारों पर गाज गिरने वाली है। सरकार इन परिवारों को बेदखल करने की कार्रवाई शुरू करने जा रही है। सरकार के इस कदम से यहां रहने वाले परिवारों के सामने छत के साथ ही रोजी रोटी का भी संकट पैदा हो जाएगा। हालांकि सरकार का कहना है कि इनको पुर्नवासित किया जाएगा। जब तक इनके लिए आवासीय परिसर उपलब्ध नहीं करा लिया जाता है तब तक सरकार इनको हटाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करेगी।
बताते चलेें कि विश्व प्रसिद्घ कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के कोर जोन में स्थित कालागढ़ बांध परियोजना की उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की कलोनी में अवैध रूप से रह रहे 964 परिवार बेदखल होंगे। कलोनी को ध्वस्त कर इस क्षेत्र को रिजर्व के कालागढ़ डिवीजन का हिस्सा बनाया जाएगा। पहले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद राज्य सरकार हरकत में आई है। वन मंत्री ड$ हरक सिंह रावत की मौजूद्गी में पिछले दिनों देहरादून में हुई उच्च स्तरीय बैठक में कलोनी से कब्जे हटाने पर मंथन किया गया। तय हुआ कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत आने वाले परिवारों के पुनर्वास के लिए राजस्व विभाग भूमि तलाशेगा। अवैध कब्जेधारकों को हटाया जाएगा।
सीटीआर के कोर जोन में कालागढ़ डिवीजन के अंतर्गत रामगंगा पर कालागढ़ बांध का निर्माण होने के साथ ही उप्र सिंचाई विभाग ने वहां आवासीय कलोनी भी बनाई। अलग राज्य बनने के बाद कालागढ़ बांध उत्तराखंड के हिस्से में आ गया। करीब 1600 आवास वाली इस कलोनी में बड़ी संख्या में लोग वर्षों से रहते आ रहे हैं। इसके चलते वन्यजीवन में पड़ रहे खलल के मद्देनजर कलोनी को खाली कराने की मांग लंबे समय से उठ रही है।मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर 2013 में अदालत ने कलोनी खाली कराने के आदेश दिए। हालांकि, बाद में मामला एनजीटी के सुपुर्द कर दिया गया।
एनजीटी ने भी कलोनी खाली कराकर इसे कालागढ़ डिवीजन में शामिल करने का आदेश दिया है। इस सबको देखते हुए पड़ताल कराई गई तो बात सामने आई कि कलोनी में 964 परिवार अवैध रूप से रह रहे हैं। सूरतेहाल, कलोनी को खाली कराना टेढ़ी खीर बना हुआ है। हालांकि, अब सरकार इस दिशा में सख्त कदम उठाने जा रही है। वन मंत्री ने उप्र सिंचाई विभाग के अफसरों को निर्देश दिए कि कालागढ़ में पार्क क्षेत्र में अवैध रूप से हुई तारबाड़ को तुरंत हटवाया जाए। साथ ही कब्जाधारकों के संबंध में पुनर्वास नीति के तहत कार्य करने को भी कहा। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि कलोनी में रह रहे जो कब्जाधारक पुनर्वास नीति के अंतर्गत आते हैं, उन्हें चिथ्ति कर पुनर्वासित किया जाएगा। बाकी हटाए जाएंगे। फिर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
यह है पुनर्वास नीति
कालागढ़ में सीटीआर की भूमि से कब्जाधारकों को हटाने संबंधी कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने उत्तराखंड पुनर्वास नीति- 2007 के तहत कब्जाधारकों के पुनर्वास का निर्णय लिया था। इस पर कुछ ने पुनर्वास नीति के तहत शपथपत्र दिया है। इनके ही पुनर्वास की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। बैठक में बताया गया कि 964 कब्जाधारक में से 401 ने शपथ पत्र दिए हैं, जबकि 540 ने उपलब्ध नहीं कराए। कुछ कब्जाधारकों ने हाईकोर्ट से स्टे लिया हुआ है।
ऐसे हुए कब्जे
सीटीआर के निदेशक सुरेंद्र मेहरा के मुताबिक वन विभाग ने 1968 में कालागढ में पार्क की भूमि उप्र सिंचाई विभाग को डैम बनाने के लिए सशर्त दी थी। डैम बनने के बाद इसे वापस किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और शेष भूमि पर अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया।