अमृत योजना से किया जाएगा नैनी झील का रखरखाव

हल्द्वानी। देश-विदेश से यहां पहुंचने वाले पर्यटकों का आकर्षण केंद्र नैनी झील को सहेजने का काम अब भारत सरकार की अमृत योजना करेगी। जिसके लिए सिंचाई विभाग ने सात करोड़ का प्रस्ताव तैयारकर केंद्र सरकार को भेजा है।नैनीताल झील का रखरखाव का जिम्मा अब सिंचाई विभाग के पास है। जिसके बाद से उसके अस्तित्व को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिशासी अभियंता हरीश चंद्र सिंह का कहना है कि झील से हो रहे पानी के रिसाव और झील को रिचार्ज करने के लिए आइआइटी रुड़की और आइएएसडब्लू देहरादून के वैज्ञानिकों के साथ समझौता हो चुका है। वह जल्द ही नैनी झील का निरीक्षण कर इस पर काम शुरू कर देंगे।
नैनी झील के रखरखाव की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की
गौरतलब है कि गर्मियों में झील के गिरते जलस्तर को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। इस योजना के तहत नालों की कवरिंग, पहाड़ों से झील में गिरने वाले पानी के स्त्रोत सहित हो रहे पानी के रिसाव को सहेजा जाएगा।
झील के लगातार गिरते जलस्तर से परेशान थी सरकार
लगातर गिरते जलस्तर को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी स्वामित्व अब सिंचाई विभाग को सौंप दी है। जिसके बाद से नैनीताल झील की कायाकल्प बढ़ने की उम्मीद जगी है। वहीं, पानी संरक्षण के लिए कई पहाड़ि‍यों के नाले इसमें गिरते हैं जिसमें अधिकतर बंद हो चुके हैं।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने मिलकर बनाई कमेटी
गौर हो कि, हर साल गर्मियों में झील का जलस्तर गिर जाने से सरकार पूरी तरह से परेशान हो गई थी। जिसके बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने खुद झील का निरीक्षण कर उच्चस्तरीय बैठक कर एक कमेटी बनाई।
वहीं, झील के अस्तित्व को खतरा पैदा होता देख हाई कोर्ट को भी संज्ञान लेना पड़ा था। इसके बाद 22 अगस्त को नैनी झील व नालों के रखरखाव का जिम्मा सिंचाई विभाग को सौंप दिया गया।
आपको अवगत कराते हैं नैनी झील की सुंदरता से
बता दें, नैनीताल का मुख्य आकर्षण नैनी झील है। स्‍कंद पुराण में इसे त्रिऋषि सरोवर भी कहा गया है। कहा जाता है कि जब अत्री, पुलस्त्य और पुलह ऋषि को नैनीताल में कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से पानी लाकर उसमें भरा। माना जाता है कि यहां डुबकी लगाने से उतना ही पुण्य मिलता है जितना मानसरोवर नदी में नहाने से मिलता है। यह झील 64 शक्ति पीठों में से एक है।
रात में होता है देखने लायक नजारा
इस सुंदर झील में नौकायन का आनंद लेने के लिए लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। झील के पानी में आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है। रात के समय जब चारों ओर बल्बों की रोशनी होती है तब तो इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। झील के उत्‍तरी किनारे को मल्‍लीताल और दक्षिणी किनारे को तल्‍लीताल करते हैं।

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