हिमाचल: प्रचार पर पूर्ण विराम, 9 को जनता करेगी फैसला

अनिल सती/कमलेश वर्मा
शिमला। हिमाचल की सर्द वादियोंं मेें राजनैतिक पारा आज चरम पर रहा। यहां हो रहे विधानसभा के चुनावी रण में प्रचार का आज आखिरी दिन था। पहाड़ों में कड़ाके की ठंड के बीच सियासी दिग्गजों की रैलियों ने जमकर चुनावी गर्माहट बिखेरी। आज भी स्टार प्रचारक और स्थानीय नेता बड़े-बड़े वादों के साथ जनता को लुभाने में लगे हुए थ। हर कोई अपने आप को जनता सबसे अधिक हितैसी बता चुनवी समर में विजय हासिल करने के लिए जीन जान से जुटा हुआ था।
बताते चलें कि हिमाचल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 9 नवंबर को होना है, लेकिन आचार संहिता के अनुसार आज चुनाव प्रचार का आखिरी दिन था इसी के चलते यहां चुनावी गर्मी के आगे सर्द मौसम लाचार नजर आ रहा था। अभी तक बीजेपी की तरफ से स्टार प्रचारकों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यानाथ और स्मृति ईरानी हिमाचल में बीजेपी के 50 प्लस के लक्ष्य के लिए ताबड़तोड़ रैलियां कर सर्दियों में भी पसीना बहा चुके हैं। आज भी योगी आदित्यनाथ समेत बड़े बीजेपी नेता बीजेपी के जनाधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
हर कोई अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए दूसरे दलों पर लांछन लगा चुनावी बैतरणी पार करने की कोशिश में है। पिछले एक सप्ताह से तो यहां का चुनावी माहौल इतना गर्म है कि उसके आगे पहाड़ की चोटियों से यहां पहुंच रही सर्दीली हवा बेवस है। नेता से लेकर कायकर्ता अपने अपने इलाके में चुनाव प्रचार में लगा हुआ है और हर दल अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। वैसे यहां देखा जाए तो मुख्य मुकाबला भाजपा और कांगे्रस के बीच है लेकिन कहीं कहीं निर्दलीय भी इस मुकाबले को रोचक बना रहे हैं। अभी तक के समीकरणों को देखा जाए तो यहां बात साफ नजर आ रही है कि हिमाचल के चुनावी समर में उतरने वाले प्रत्याशी अपनी साफ छवि के बजाए जनता के साथ किए गये वादों से चुनाव जीतने की फिराक में हैं। भाजपा हो या कांगे्रस दोनों ही दल यहां सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। इस पूरे चुनावी समर में इस बात स्थानीय मुद्दे तो पूरी तरह से गौंण दिखायी दिए। दोनों ही दलों ने राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ा हैं। यहां सबसे अधिक नोटबंदी और महंगाई ही चुनावी मुद्दा रहा जबकि शिमला का कोट खाई प्रकरण भी कुछ हद तक भाजपा भुनाने का प्रयास करने में लगी रही। इसके अलावा कोई भी प्रत्याशी विकास की बात पर वोट मांगता नजर नहीं आया। इस चुनाव की सबसे अधिक खास बात यह रही कि यहां भाजपा और कांग्रे्रस दोनों ही दलों के शीर्ष नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी।
इस चुनाव के अंतिम पड़ाव में राहुल गांधी ने भी 3 सभाएं कर वीरभद्र को सांत्वना दी। कांग्रेस की तरफ से प्रचार की कमान खुद वीरभद्र सिंह संभाले हुए थे जबकि भाजपा ने प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री बनाने का वादा कर यहां के लोगों को अपनी ओर करने की कोशिश की है। इस सब के बीच आखिर मंगलवार की शाम को तमाम शोर-गुल पर रोक लग गयी और 9 नवंबर को जनता जनार्दन ईवीएम पर बटन दबाकर उम्मीदवारों की भाग्य विधाता बनेगी। हिमाचल विधानसभा चुनाव के नतीजे 18 दिसंबर को सामने आएंगे।