मुश्किलों मे भंसाली की फिल्म पद्मावती

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ मुश्किलों में फंसती नजर आ रही हैं। फिल्म की डेट जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं वैसे-वैसे इसका विरोध बढ़ता ही जा रहा हैं। केन्द्रीय मंत्री उमा भारती और गिरिराज सिंह के बाद जैन मुनि ने एक वीडियो के जरिए फिल्म पद्मावती की कहानी से छेड़छाड़ पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जैन मुनि ने आक्रामक तेवर में इस फिल्म का विरोध करने की अपील की है। लेकिन इसी बीच फिल्म पद्मावती को लेकर मआर सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने भी आपत्ति जताई है।
मुन्नी देवी रजमानी सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सेंट्रल बोर्ड अॉफ फिल्म सर्टिफिकेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव से मुलाकात की। ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील मणि सिंह का कहना है कि, फिल्म में रानी पद्मावती को कई जगहों पर नाचते हुए दिखाया गया है जो कि गलत है। इस प्रकार रानी पद्मावती को नीचा दिखाया गया है और इतिहास से छेड़छाड़ की गई है।रानी पद्मावती हम राजपूतो के लिए त्याग, तपस्या, बलिदान की प्रेरणस्त्रोत है, जो कि पूज्यनीय है। फिल्म पद्मावती से हमारी आस्था को गहरी ठेस पहुंची है। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सोनी सिंह का कहना है कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अल्लाउद्दीन खिलजी को फिल्म में महान बताया गया है जो कि पूरी तरह से गलत है।इसलिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मुलाकात में फिल्म से विवादस्पद चीजों को तुरंत हटाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर एेसा नहीं किया जाता है तो वो फिर से फिल्म के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करेंगे। आपको बता दें की तेलंगाना के एक और बीजेपी विधायक राजा सिंह ने कहा कि अगर पद्मावती ने इतिहास से छेड़छाड़ की है, तो संजय लीला भंसाली को उसकी कीमत चुकानी होगी। तेलंगाना में फिल्म रिलीज नहीं होने देंगे। इतना ही नहीं बजरंग दल ने निर्देशक संजय लीला भंसाली की पद्मावती फिल्म को रिलीज नहीं होने देने की ठानी है। आज बजरंग दल राजसथान ने सरकार को चेताया है कि इस फिल्म का प्रदर्शन होने नहीं दिया जाएगा।इसके अलावा राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजराज आदि राज्यों में भी इसका विरोध हो रहा है। राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेडी ने कहा है कि राजस्थान के साथ अन्य राज्यों में पद्मावती फिल्म का विरोध किया जाएगा। राजस्थान में इसे तब तक प्रदर्शित नहीं करने दिया जाएगा, जब तक इस फिल्म को इतिहासकारों और समाज के प्रतिनिधियों को दिखाया नहीं जाता और वो इस फिल्म को ओके नहीं कर देते। अगर फिल्म में राजपूत इतिहास और रानी पद्यावती की गलत छवि का चित्रण किया तो फिल्म रिलीज नहीं होने देंगे।