पशुओं से क्रुरता व बेसहारा छोडऩा दंडनीय अपराध…किशन लाल
कमलेश वर्मा (परी)
कुल्लू । पशुओं से क्रुरता व पशुओं को बेसहारा छोडऩा दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। प्रसिद्ध पर्यावरण विद एवं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता किशन लाल ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी देते हुए बताया कि सर्दियों के मौसम में लोग अपने पालतू पशुओं को बीमारी की दशा में , बूढ़ा होने पर ,चारे की कमी के चलते आवारा छोड़ देते हैं और यह पशु फसलों को नुक्सान पहुंचाते हैं तथा अन्य समस्याएं खड़ी करते हैं। किशन ने कहा कि पशु को मारना पीटना, बोझ ढोने के लिए उन्हें कष्ट पहुंचाना , पशु को उचित स्थान पर न रखना ,पर्याप्त भोजन पानी न देना , रोगग्रस्त होने पर भी काम लेना, पशु को भूखा प्यासा व बीमारी या घायल होने की दशा में असहाय छोडऩा , किसी भी पशु का अंग भंग करना , इंजैक्शन आदि दे कर या अन्य ढंग से क्रुरता पूर्वक मारना चाहे वह पालतू हो या आवारा ही क्यों न हो यह सब पशु क्रुरता रोकथाम अधिनियम की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि पालतू कुत्ते को भी लंबे समय तक चेन से बांध कर नहीं रखा जा सकता । किशन ने कहा कि धर्म शास्त्रोंं के अनुसार पशुओं पर अत्याचार करने वालों को कभी मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती । उन्होंने कहा कि पशु कु्ररता रोकथाम अधिनियम 1960 के अधीन भी पशुओं से क्रूर व्यवहार करने वाले को 1000 रूपए जुर्माना व दो से तीन साल का कारावास हो सकता है। इसलिए लोग अपने पालतू पशुओं को किसी भी हालत में बेसहारा न छोडें और पशुओं पर किए जाने वाले अत्याचार से परहेज करें