जीएसटी की दरों में कटौती का श्रेय राहुल को जाता हैः कांग्रेस

कांग्रेस ने रोजमर्रा के इस्तेमाल की 178 वस्तुओं पर टैक्स में कटौती के जीएसटी कौंसिल के फैसले का श्रेय लेने की कोशिश की। उसने कहा कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा डाले गए दबाव और चुनाव का सामना कर रहे गुजरात में उसके प्रचार को मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया की वजह से सरकार यह कदम उठाने पर मजबूर हुई। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिये सरकार पर हमला करते हुए राहुल ने कहा कि कांग्रेस जीएसटी की सर्वोच्च दर 18 फीसदी पर लाने के लिये लड़ाई जारी रखेगी और संकल्प जताया कि अगर सत्तारूढ़ भाजपा नहीं कर पाती है तो उनकी पार्टी यह काम करेगी।फिलहाल जीएसटी के तहत कर की सर्वोच्च दर 28 फीसदी है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि भारत को सरल कर प्रणाली की आवश्यकता है और ‘गब्बर सिंह टैक्स’ की आवश्यकता नहीं है। राहुल मोदी सरकार को निशाना बनाने के लिये जीएसटी को ‘गब्बर सिंह टैक्स’ बताते रहे हैं।गुजरात में कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल की ओर से बढ़ाए गए दबाव और चुनाव का सामना करने जा रहे गुजरात में उसे मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया के मद्देनजर जीएसटी कौंसिल ने शुक्रवार को कर की दरों में कटौती करने का फैसला किया था। गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गृह राज्य है। गुजरात में भाजपा दो दशक से अधिक समय से सत्ता में है और कांग्रेस उसे सत्ता से बेदखल करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस नेताओं और खासतौर पर राहुल ने चुनाव प्रचार में जीएसटी और नोटबंदी को अहम मुद्दा बनाया है। गहलोत ने दावा किया कि जीएसटी कौंसिल ने गुजरात में वोट को ध्यान में रखकर कर की दरों में बदलाव किया। राज्य में नौ और 14 दिसंबर को दो चरणों में मतदान होना है।गहलोत ने कहा, ‘‘यह (भाजपा) इस बात से घबराई हुई है कि गुजरात उसके हाथ से निकल जाएगा। इसलिये दरों में कटौती की गई है। काउन्सिल ने राहुलजी के दबाव बढ़ाने और राज्य में उनकी यात्राओं को मिल रही प्रतिक्रिया के मद्देनजर ऐसा किया।कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जीएसटी काउन्सिल के कदम को ‘किश्त आधारित फेरबदल’ बताया। उन्होंने कहा कि यह भाजपा नीत केंद्र सरकार के भीतर ‘अव्यवस्था और ऐडहॉकिज्म (योजना के अभाव)’ को दर्शाता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली और सरकार पर ‘जुबानी जमा खर्च करने और तबाही पैदा करने’ का आरोप लगाते हुए सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस कर व्यवस्था को ‘त्रुटिविहीन’ बनाने के लिये प्रतिबद्ध है।राहुल ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘भारत को सरल कर की आवश्यकता है। उसे गब्बर सिंह टैक्स की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस और लोगों ने लड़कर कई वस्तुओं पर 28 फीसदी कर समाप्त करवा दिया है। हमारी 18 फीसदी कर सीमा के साथ एक दर के लिये लड़ाई जारी रहेगी। अगर भाजपा ऐसा नहीं करती है तो कांग्रेस ऐसा करेगी।सुरजेवाला ने मांग की कि पेट्रोलियम उत्पाद, रियल एस्टेट और बिजली को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिये। उन्होंने जीएसटी के ‘अनुपालन बोझ’ को भी कम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘विकृत कर व्यवस्था’ की वजह से वस्त्र उद्योग पर भारी दबाव है। उन्होंने कहा, ‘‘फैसले की बजाय स्थगन और टालना इस सरकार का आगे का रास्ता लगता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘काउन्सिल ने इनमें से किसी भी चुनौती का निराकरण नहीं किया है। ऐसा भाजपा सरकार द्वारा सबसे बड़े कर सुधार से निपटने में बिल्कुल अकुशलता और अनाड़ीपन दिखाने की वजह से हो रहा है।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी को इसका श्रेय दिया जाना चाहिये। खेड़ा ने कहा ‘‘राहुल गांधी की तरफ से दबाव था। गब्बर सिंह टैक्स गुजरात में इतना वाइरल हुआ कि भाजपा को पता ही नहीं है कि इससे कैसे निपटें।’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि किसानों को राहत दिये जाने के लिये और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है क्योंकि जीएसटी से पहले खाद पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क 1.03 फीसदी था, लेकिन नयी कर व्यवस्था के लागू होने के बाद कर बढ़कर पांच फीसदी हो गया है। उन्होंने कहा कि कृषि उपकरणों यथा ट्रैक्टर पर कर की दर 18 फीसदी है। जीएसटी काउन्सिल ने शुक्रवार को कई वस्तुओं पर कर की दर को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का फैसला किया था।

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