‘शादी में जरूर आना’ का एकमात्र प्लस प्वाइंट हैं राजकुमार राव

इस सप्ताह प्रदर्शित फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ देखकर दर्शकों का निर्देशक रत्ना सिन्हा से मोहभंग हो सकता है और उन्हें अगली फिल्म का टाइटल ‘दर्शकों जरूर आना’ रखना पड़ सकता है। राजकुमार राव बेहतरीन अभिनेता हैं लेकिन सिर्फ उन्हीं के दम पर किसी भी फिल्म को खींच दिया जाये यह संभव नहीं है। कहानी के लिहाज से देखें तो फिल्म थोड़ा हट कर है लेकिन छोटी-सी कहानी को इतना लंबा खींच दिया गया है कि यह दर्शकों के सब्र का इम्तिहान हो गया है। इस फिल्म के प्रदर्शित होने से पहले इसे चर्चा में लाने के लिए राजकुमार राव और अभिनेत्री कृति खरबंदा के रोमांस की खबरें भी उड़ाई गईं लेकिन इसका शायद ही कोई फायदा इस फिल्म को हो।फिल्म की कहानी पूरी तरह सत्येंद्र मिश्रा उर्फ सत्तु (राजकुमार राव) के इर्दगिर्द घूमती है। वह कानपुर के एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क है। उसके घरवाले चाहते हैं कि उसकी शादी हो जाये इसके लिए वह उसे एक लड़की आरती (कृति खरबंदा) का फोटो दिखाते हैं तो वह उसे पसंद आ जाती है। लेकिन दूसरी ओर आरती अपना कॅरियर बनाना चाहती है और अभी शादी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती। घरवाले जब ज्यादा दबाव देते हैं तो वह सत्तु से मिलने को तैयार हो जाती है। दोनों जब पहली बार मिलते हैं तो एक दूसरे को दिल दे बैठते हैं। घरवाले इससे खुश होकर शादी की तैयारियों में जुट जाते हैं लेकिन ऐन शादी वाले दिन आरती गायब हो जाती है। अब सत्तु को लगता है कि आरती ने उसे धोखा दिया है इसलिये वह काफी गुस्से से भर जाता है और बदला लेने की जुगत भिड़ाता है।अभिनय के मामले में राजकुमार राव का जवाब नहीं। पिछले दिनों आई उनकी फिल्मों को देखें तो कहा जा सकता है कि उनके अभिनय में विविधता है और वह हर तरह के रोल कर रहे हैं और उनमें जम भी रहे हैं। कृति का काम ठीकठाक है। अन्य सभी कलाकार सामान्य रहे। फिल्म के एक गीत ‘पल्लू लटके’ का फिल्मांकन भायेगा। अन्य सभी गीत फिल्म की गति को बाधित करते हैं। निर्देशक रत्ना सिन्हा की इस फिल्म में वैसे ऐसा कुछ खास नहीं है जिसे देखने के लिए सिनेमाघर जाकर समय और पैसे लगाये जायें।

कलाकार- राजकुमार राव, कृति खरबंदा और निर्देशक रत्ना सिन्हा।

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