पराली को लेकर तीनो राज्यों के मुख्यमंत्री आमने सामने

पराली को लेकर तीनो राज्यों के मुख्यमंत्री आमने सामने
प्रदूषण से निपटने की जमीनी हकीकत को हमारे देश के नेता समझना नहीं चाह रहे हैं। यही वजह है कि प्रदूषण के नाम पर जोर-शोर से सियासत जारी है।
नई दिल्ली। दिल्ली समेत देश के चार दूसरे राज्यों पर छाए स्मॉग की देश और विदेशों में चर्चा हो रही है। आलम यह है कि लगातार वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं इसका असर भारत और खासकर दिल्ली आने वाले सैलानियों पर भी पड़ रहा है। एनजीटी हो या फिर सुप्रीम कोर्ट, लगातार सरकारों को इसको लेकर फटकार लगा रहे हैं। लेकिन इन सभी के बीच प्रदूषण से निपटने की जमीनी हकीकत को हमारे देश के नेता समझना नहीं चाह रहे हैं। यही वजह है कि प्रदूषण के नाम पर जोर-शोर से सियासत जारी है। यहां पर यह बात ध्यान में रखनी बेहद जरूरी है कि प्रदूषण को लेकर लगातार पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा जलाई जा रही पराली को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। अब इसी पराली को लेकर दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के सीएम आमने-सामने हैं। पंजाब इस मामले में केंद्र के दखल देने की भी मांग कर रहा है, जबकि दिल्ली और हरियाणा एक दूसरे पर आरोप मढ़ने में लगे हैं।
दिल्ली-हरियाणा में आरोप-प्रत्यारोपों का दौर
दिल्ली सरकार का आरोप है कि पंजाब व हरियाणा की सरकारें किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए कारगर उपाय नहीं करती हैं। इस बाबत हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखकर पूछा है कि दिल्ली के आसपास किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए उन्होंने क्या उपाय किए हैं। इस पत्र में उन्होंने यह भी कहा है कि दिल्ली के इर्दगिर्द करीब 40 हजार परिवार 40 हजार हेक्टेयर जमीन पर खेती करते हैं, क्या दिल्ली सरकार ने उन्हें ऐसा न करने देने के लिए कोई कदम उठाए हैं। कोई उपाय किए हैं…
खट्टर के सवालों के जवाब में दिल्ली सरकार की तरफ से कहा गया है कि हरियाणा और अन्य राज्यों में फसल की कटाई मशीनों से होती है, जिससे बड़ी ठूंठ रह जाती है और उसे जलाना पड़ता है, जबकि दिल्ली में किसान फसलों को जड़ के करीब से काटते हैं। दिल्ली सरकार की तरफ से यह भी कहा गया है कि वह इस प्रदूषण को रोकने के लिए जितना कर सकती थी, उससे कहीं ज्यादा कर रही है।