विदेशों में जालसाजी के भेजा जाने वाला था बेरोजगारों का डाटा
देहरादून। समय रहते यदि पुलिस की कार्रवाही नहीं होती तो दून के कई बेरोजगारों के नाम से विदेशों में जालसाजी हो चुकी होती, जी हां पुलिस को पिछले दिनों क्लेमेनटाउन के बिजनेस पार्क में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर के संबंध जो जानकारी मिल रही है वह तो यही संकेत दे रही है। पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार कॉल सेंटर संचालकों की ओर से बेरोजगार युवाओं का डाटा विदेश भेजने की भी तैयारी चल रही थी। एसटीएफ की अब तक की जांच में इसके पुख्ता सबूत तो नहीं मिले हैं, लेकिन कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिससे इस बात की आशंका बढ़ गई है। एसटीएफ अब संचालकों के कॉल डिटेल के साथ उन वेबसाइटों का विदेश कनेक्शन भी खंगालने में जुट गई है, जहां से कॉल सेंटर लोगों की निजी जानकारी का डाटा खरीदता था।
बता दें कि बीते सोमवार को क्लेमेनटाउन के बिजनेस पार्क में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का एसटीएफ ने खुलासा किया था। तकरीबन एक साल से चल रहे इस कॉल सेंटर से पश्चिम और दक्षिण के राज्यों के युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी की जा रही थी। कॉल सेंटर मोटी रकम देकर तीन महीने के लिए कुछ वेबसाइटों से बेरोजगारों का डाटा खरीदता था, फिर उन्हें एक-एक कर फोन करते और जो भी झांसे में आ जाता, उसे ठगी का शिकार बना लेते। अब तक की जांच में एसटीएफ के हाथ कुछ ऐसी जानकारी लगी है, जो होश उड़ाने वाली है। दरअसल, संदेह यह है कि कॉल सेंटर वेबसाइट से जो डाटा खरीदता था उसे विदेश भेजने की तैयारी थी। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कॉल सेंटर से डाटा भेजा गया है या नहीं। एसएसपी एसटीएफ रिदिम अग्रवाल ने बताया कि एटीएम फ्रॉड और फंड ट्रांसफर के अधिकांश मामले विदेशों की धरती से अंजाम दिए जाते हैं। विदेशों में बैठे जालसाज देश में चल रहे कॉल सेंटरों से लोगों का डाटा खरीदते हैं और फिर उनसे फ्रॉड करते हैं। एसटीएफ कॉल सेंटर की इस लिहाज से भी जांच की जा रही है। इसके साथ वेबसाइटों के लिंक की भी जा की जा रही है कि वह विदेश के संपर्क में थे या नहीं।