शूणा ओ लोको आरटीआई आऊ‘ गीत से किया जागरूक
-मनाली व करजां में दी सूचना का अधिकार अधिनियम की जानकारी
कमलेश वर्मा (परी)
कुल्लू, 18 नवबंर। प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान शिमला (हिप्पा) व सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के संयुक्त तत्वावधान सेे सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के प्रचार को प्रदेशव्यापी जन जागरूकता अभियान आज संपन्न हो गया। अभियान के अंतिम दिन मन्नत कला मंच के कलाकारों ने नग्गर विकास खंड लोकगीतों, नृत्य व लोक नाट्य के माध्यम से जागरूक किया गया। कलाकारों ने मनाली व करजां में लोगों को सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के विभिन्न एक्टों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। मंच के कलाकारों में खूबराम तीर्थराम, मानचंद, मोनिका, सपना, प्रिया ने,’गांव गांव और शहर शहर में यह अभियान चलाना हैं सूचना का अधिकार क्या सबको ये समझाना हैं‘,’शूणा ओ लोको आर टी आई आऊ‘आदि कुल्लवी नाटीयों से खूब मंनोरजन किया वहीं नवनीत भारद्धाज, इंदू, रमेश, कुशाल, संजू आदि ने कार्यक्रम में ”जानने का हक” नामक नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को इस अधिनियम के उद्देश्य जैसे शासन व्यवस्था में खुलापन लाना एवं भ्रष्टाचार दूर करना, शासन व्यवस्था को जनता के प्रति जवाबदेही बनाना, रोजमर्रा़ जिंदगी की समस्यायों के बारे में सूचना देना आदि के बारे विस्तार से जानकारी दी। जिला लोक सम्पर्क अधिकारी शेर सिंह ने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के लागू होने से विभिन्न सरकारी कार्यो में पारदर्शिता के साथ-साथ दक्षता भी आई है और लोगों द्वारा मांगी की गई सूचनाऐं उन्हें समय अवधि के भीतर मिलने लगी है। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रदेश व देश में पहली बार हुआ है कि लोगों को यह अधिकार दिया गया है कि वे पंचायत क्षेत्रों में करवाए गए कार्यो, सरकारी एजैंसियों द्वारा करवाए जा रहे कार्यों में हुई अनियमितता की शंका को देखते हुए या विभागों से किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त करने के लिए सूचना के अधिकार का इस्तेमाल कर सकते है। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदक को 10 रुपये का आईपीओ आवदेन के साथ लगाना अनिवार्य है और मांगी गई सूचना के प्रति पृष्ठ दो रुपये के हिसाब से विभाग के पास जमा करवाना अनिवार्य है, लेकिन यदि आवेदन कर्ता आईआरडीपी/बीपीएल से संबंध रखता है तो उसे सूचना अधिकारी के पास सिर्फ आवेदन की जमा करवाना होता है और उस विभाग या सरकारी एजैंसी का यह दायित्व बनता है कि वे आवेदनकर्ता द्वारा मांगी गई सूचना को 30 दिनों के भीतर उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें और यदि विभागाधिकारी द्वारा समय अवधि के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं करवाई तो उस स्थिति में दोषी अधिकारी को अधिनियम के अन्तर्गत जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।