निरमंड-आनी के कई क्षेत्रों में बूढ़ी दीवाली की धूम, देवमयी हुई दोनों घाटियां

-जिला स्तरीय निरमण्ड मेले में कुल्लवी गायक इन्द्रजीत ने मचाया धमाल
-चार दिवसीय मेले में प्रदेश के कई गायकों ने मचाया धमाल
-हिमाचल-उत्तराखंड के कई जिलों में मनाई जा रही है बूढ़ी दीवाली
– आज भी हिमाचल के कई जिलों में बखूबी हो रहा प्राचीन संस्कृति का निर्वहन
कमलेश वर्मा (परी)
कुल्लू, 20 नवबंर। भले ही आज हिमाचल की युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता के रंग में रंगने लगी है, लेकिन देवभूमि हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां आज भी पुरातन संस्कृति का बखूबी निर्वहन किया जा रहा है। प्राचीन संस्कृति की झलक यहां के मेलों, त्योहारों व उत्सवों में खूब दिखाई देती है। फिर चाहे कुल्लू का अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव हो या फिर छोटी काशी के नाम से मशहूर मंडी की शिवरात्रि या अन्य दूसरे जिलों में मनाए जाने वाले उत्सव व त्यौहार हों हर ज़िला में पारंपरिक रूप से हमारी पुरातन संस्कृति का आज भी वखूबी निर्वहन किया जाता है। कुल्लू ज़िला के आनी-निरमंड में मनाए जाने वाले मेलों व त्योहारों में भी हमारी प्राचीन विरासत के दर्शन होते हैं। इन्हीं त्योहारों में एक है निरमंड व आनी के कुछ क्षेत्रों में मनाये जाने वाली बूढ़ी दीवाली। बूढ़ी दीवाली की इन दिनों निरमंड-आनी में खूब धूम है। सनद रहे कि पूरे देश में दीवाली उत्सव के एक माह बाद हिमाचल -उत्तराखंड के कुछ जिलों में बूढ़ी दीवाली त्योहार मनाने की परंपरा है। पहाड़ की दिवाली का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि जहां देशभर में दिवाली को रामायण से ही जोड़ा जाता है लेकिन यहां की दिवाली का रामायण के अलावा महाभारत से भी जुड़ाव है। आनी,निरमंड में होने वाले इस उत्सव में पहले दिन जहां रात को कबीरी पंडित पंरपंरागत काऊ गीत गाते हैं। इनमें हनुमान के गीत के अलावा हनुमान-सीता संवाद, हनुमान- विभीषण संवाद से लेकर भगवान राम के आयोध्या तक आने का पूरा विवरण पेश किया जाएगा। दूसरे दिन कौरव और पांडव के प्रतीक के तौर पर दो दल रस्साकसी करेंगे। विशेष तौर से बनाई गई मूंजी घास के रस्से से दोनों दल एक-दूसरे के साथ शक्ति प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा रात को एक दल गांव में मशालों के साथ प्रवेश करता है। बूढी दिवाली के अवसर पर पहाड़ में दीये के स्थान पर मशालें जलाने की रिवायत है। यही नहीं इसके बाद लगातार फरवरी माह तक लगातार दिवाली यानि दियाली मनाने का सिलसिला जारी रहेगा।
सबसे अंत में फरवरी माह में लाहौल-स्पीति में दियाली मनाई जाएगी। वहां पर भी प्रकाश का प्रतीक मशालें जलाई जाएंगी। बुजुर्गों के अनुसार जब भगवान राम ने लंका पर विजय का परचम लहराया था और वे 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तो उनके अयोध्या लौटने की खुशी में लोगों ने घी के दीये जलाए थे और तब से लेकर पूरे देश में धूमधाम से दीवाली मनाई जाती है लेकिन पहाड़ों पर भगवान राम की लंका पर विजय का पता काफी देर बाद चला था जिस कारण तब से लेकर दीवाली के एक माह बाद बूढ़ी दीवाली मनाने की परंपरा शुरू हो गई। यही नहीं दीवाली के समय जहां दीये जलाने की रिवायत है वहीं , बूढ़ी दीवाली पर लोग दीये के स्थान पर मशालें जलाते हैं। बूढ़ी दिवाली वैदिक पंरपरा का निर्वाह भी करती है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि इसका रामायण काल व महाभारत काल से सीधा संबंध रहा है। इसी कड़ी में कुल्लू ज़िला के निरमंड व आनी के कई क्षेत्रों में धूमधाम से बूढ़ी दीवाली मनाई जाती है ।कुल्लू ज़िला के सबसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक गांव निरमण्ड में जिला स्तरीय दीवाली मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है। मेला कमेटी की सचिव तहसीलदार निरमण्ड नीरजा शर्मा ने बताया कि निरमण्ड बूढी दीवाली मेला 18 से 21 नवबंर तक देव पंरपरा के अनुसार मनाया जा रहा है। मेले का आगाज जहां देवता ढरोपू देवता शिवजी सरकोटी के आगमन से हुआ वहीं, देव परंपरा अनुसार जूना अखाडा निरमण्ड में पूजापाठ भी किया गया जिसमें स्थानीय लोगों ने प्राचीन रिति रिवाज़ से पहाड़ी काव, दीवाली गीत गाए। मेले की पहली रात्रि आग की मशालें जलाकर देवगीत गाकर ग्रामीणों ने पूरी रात दीवाली के गीतों से निरमण्ड क्षेत्र को देवमयी किया। वहीं, दूसरी रात्रि सांस्कृतिक संध्या में भगवान परशुराम पब्लिक स्कूल निरमण्ड व स्थानीय सरकारी व निजि स्कूलों के छात्र छात्रओ ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। स्टार नाईट कलाकार के रूप में कुल्लू के मशूहर गायक इन्द्रजीत ने हाय मेरे मामुआ,जोता रा मिरग नाला वे होथा,पधरे खेचे है मामा विजनी छाली,ठाण्डा पानी डिवरू ओ,आमा बापू ऐ मेरी झूरी,झूरी मेरी नाची लोडी महाराज ढोलकी,बाजी केरू ढोलकी,तू ढूरी भाले कोखा री,आयो रे माया रे सिला चूटदा मारी, मेरी झूरी सभी का शोभली,कुल्लू रा देश सभी का बीता,दिलडू होना राजी आदि कुल्ल्वी गीत गाकर मेलें में बैठे पण्डाल को नाचने पर मजबूर कर दिया।मंगलवार की रात्रि हिमाचली गायक विक्की चौहान रंग जमाएगें। सोमवार के कार्यक्रम में मुख्यातिथि डा. धनश्याम वर्मा पहुंचे। इस अवसर पर जिला स्तरीय मेला कमेटी की सचिव तहसीलदार नीरजा शर्मा,प्रभारी योगानन्द शर्मा,कुलवन्त कश्यप,विकास,शानती देवी,सुरेन्द्रकौर,पुष्पेन्द्र,प्रेमराज,कुशलानन्द,दीपक,एसडीओ एमडी अकेला,सहित मेला कमेटी के सभी सदस्य उपस्थित थे।

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आनी के कुईंर में धूमधाम से मनाई बूढ़ी दीवाली
-पूनम सरमैक और नरेश तंगडायिक ने मचाया धमाल
आनी खण्ड की मुहान पंचायत की कुईंर बूढ़ी दिवाली का विधिवत समापन हो गया है। समापन अवसर पर जहां पौराणिक संस्कृति का निर्वहन हुआ वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। रोहडू के कलाकारों ने समापन अवसर पर बेहतरीन नगमे गाकर दर्शकों को नाचने पर विवश कर दिया। राहडू की कलाकारा पुनम सरमैक ने मेरे रशके कमर, मिले हो तुम हमको बडे नसीबों से, बिंदिया घरे लागा रैडियो, ओ लाल मेरी रखियो, ने एक से बढ़कर एक बेहतर प्रस्तुतियां दे कर दर्शकों का मनोरंजन किया। नरेश तंगडायिक ने हिन्दी, पहाडी गीत गाकर समा बांधा। समापन्न अवसर समाजसेवी राजेन्द्र ठाकुर प्रताप ठाकुर ने मुख्यातिथि बतौर शिरक्त की। इस मौके पर उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया। अंत में अराध्य देवता ब्यास ऋषि की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई जिसमें क्षेत्र के सैंकड़ो लोगों ने भाग लिया तथा देवनाटी से मेले का भव्य समापन किया गया। इस अवसर पर नवप्रभावत युवा संघ के अध्यक्ष हरीश शर्मा, ठाकुरचन्द वर्मा, पप्पू सत्या, रिंकु सोनी, विनोद शर्मा, भूपेन्द्र शर्मा, इंन्द्र पाल, संजीव, विक्की वर्मा, प्रदीप, आशिष शर्मा, सोनू वर्मा सहित सैंकडो लोग मौजूद थे।

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