क्या उत्तराखंड के निकाय चुनावी परीक्षा में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र जी होंगे पास ?

देहरादून। यूपी में हुए निकाय चुनावो में योगी जी तो जनता का दिल जीतने में कामयाब रहे लेकिन अब बारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह की अग्नि परीक्षा की है कि वह किस तरह से इस सत्ता को सँभालने में कामयाब होंगे। क्या उत्तराखंड में भी भाजपा का ही पलड़ा भरी रहेगा , यह सब तो उत्तराखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव में ही पता चलेगा ।
अप्रैल 2018 में उत्तराखंड में नगर निकाय चुनाव
आपको बता दे कि अप्रैल 2018 में उत्तराखंड में नगर निकाय चुनाव होने हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए एक साल के कार्यकाल के नतीजों को जनमत के आधार पर आंकने का अवसर बनने जा रहा है।
वैसे तो उत्तराखंड में नगर निकायों की कुल संख्या 92 है, लेकिन इनमें नगर निगम केवल आठ ही हैं। अगर प्रदेश की भाजपा सरकार के आठ माह के कामकाज का आंकलन का आधार केवल नगर निगमों को ही बनाएं तो भाजपा को इस निकाय चुनाव में आठ नगर निगमों पर काबिज होने के लिए सियासी जंग लड़नी होगी।
दो निगमों के बनने से भाजपा को कठोर परिश्रम की ज़रूरत
सरकार ने दो नए नगर निगम कोटद्वार व ऋषिकेश हाल ही में सृजित किए हैं, जबकि बाकी छह नगर निगमों में से पांच पर भाजपा ही काबिज है। देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी में भाजपा के महापौर हैं जबकि पिछले चुनाव में काशीपुर और रुड़की में निर्दलीय प्रत्याशी जीते थे। इनमें से एक भाजपा व दूसरे कांग्रेस में शामिल हो गए।
इस बार दो नए निगमों के बनने से भाजपा को कड़ी मेहनत करनी होगी। साफ है कि यह भाजपा के लिए संतोष की बात है कि पांच सिटिंग महापौर उसके हैं, लेकिन देखा जाए तो यह बड़ी चुनौती भी रहेगी कि पार्टी आगामी निकाय चुनाव में अपनी सीटों को बचाने में कामयाब होगी या नहीं ।

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