किसानों को सताने लगी फसल के खेतों में खराब होने की चिंता

-फोरलेन निर्माण से बढ़ी स्नोर घाटी के किसानों की दिक्कत
-एनएचआई ने सिंचाई एवं पेयजल योजना के कटवाएं बिजली के मीटर
-किसानों ने उठाई कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग
कमलेश वर्मा(परी), कुल्लू, 04 दिसंबर। एक तरफ जहां मनाली-नागचला फोरलेन निर्माण प्रभावितों को आए दिन किसी ने किसी परेशानी से जूझना पड़ रहा है और उनकी परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं वहीं, दूसरी तरफ अब यहां के किसानों को एक और समस्या से जूझना पड़ रहा है। फोरलेन ने स्नोर घाटी के दर्जनों किसानों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। गौर रहे कि ब्यास नदी के किनारे घाटी के दर्जनों किसानों और बागवानों ने अपनी सिचाईं और पेयजल की योजना तैयार की थी लेकिन अब एनएचआई
ने इन किसानों के बिजली के मीटर कटवाया दिए और उन्हें शैड तोडऩे के फरमान भी जारी कर दिए हैं जिसके चलते अधिकत्तर किसानों ने अपने शैड उखाड़ दिए हैं लेकिन अब
घाटी के सैकड़ों किसानों और बागवानों को अपनी फसल की चिंता सता रही है। घाटी के बागवान संदीप ठाकुर का कहना है कि उनकी सारी कृषि और बागवानी इसी
सिंचाई योजना पर निर्भर थी। पानी की मोटर को उखाडऩे के बाद उनकी फसल खेतों में खराब हो रही है और न ही वे नई फसल की बिजाई कर पा रहे हैं। गांव की स्वजलधारा योजना का मीटर भी काट दिया गया है। इस कारण पेयजल की भी समस्या पैदा हो गई है। स्थानीय किसान कमल शर्मा का कहना है कि पानी की मोटर को उखाडऩे के बाद उनकी दिक्कत काफी बढ़ गई है। अब उन्हें अपनी फसल की चिंता सताने लगी हैं। बिन पानी के सारी फसल खेतों में खराब हो रही है। वहीं, नगवाईं के किसान सौरभ ठाकुर ने बताया कि उनके पास 40 बीघा भूमि है, लेकिन पानी की मोटर उखाडऩे के बाद उनकी सारी फसल खराब हो रही है और
उन्हें भारी नुक्सान हो रहा है। घाटी के किसानों और बागवानों ने एनएचआई और जिला प्रशासन से उनके लिए सिंचाई की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की
मांग की है। लोगों का कहना है कि जल्द ही यदि कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो उन्हें भारी नुक्सान झेलना पड़ेगा।

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