कसोल में होटलों के बिजली-पानी काटना नहीं है समस्या का सही समाधान: किशन ठाकुर
-मणिकर्ण-कसोल के पर्यटन को बचाने के लिए सरकार को करने होंगे प्रयास
-कहा:मणिकर्ण-कसोल में साडा को खत्म कर पर्यटन को दी जाए गति
कमलेश वर्मा(परी), कुल्लू,08 दिसंबर। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी कसोल में बिना पंजीकृत कोई भी पर्यटन उद्योग (होटल) न चलाएं जाएं इसका मणिकर्ण वैली होटल एशोसिएशन समर्थन करती है। लेकिन कसोल और मणिकर्ण में सरकार द्वारा साडा लगाया गया है और पर्यटन उद्योग होटल आदि की रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए जो विभाग ने औपचारिकताएं रखी हैं वह लोगों द्वारा पूरी करना बहुत मुश्किल है। यह बात मणिकर्ण वैली होटल एशोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर ने यहां पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने इस बारे में सरकार से आग्रह किया है कि साडा के तहत लोगों को छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि मणिकर्ण-कसोल के पर्यटन व्यवसाय को बचाने के लिए सरकार व प्रशासन को प्रयास करने होंगे। होटलों के बिजली, पानी के कनैक्शन काटना समाधान नहीं है। जिला कुल्लू की मणिकर्ण घाटी में सैंकड़ों युवक होटल, गैस्ट हाऊस व होम स्टे के माध्यम से अपना रोजगार चला रहे है। ऐसे में अगर प्रशासन द्वारा उनके होटलों के बिजली व पानी के कनैक्शन काट दिए गए तो वो सभी बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन माननीय न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का स्वागत करती है। लेकिन गैर पंजीकृत होटलों के संचालकों को पंजीकरण करने के लिए थोड़े दिनों का समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मणिकर्ण व कसोल को स्पैशल एरिया डेवेलपमेंट अथॉरिटी साडा के तहत लाया गया है। जिस कारण होटलों व गैस्ट हाउस के पंजीकरण के लिए संचालकों को खासी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। कसोल सिर्फ 100 बीघा व मणिकर्ण मात्र 30 बीघा भूमि में बसा है। ऐसे में उन जगहों पर साडा लगाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। कई बार होटल एसोसिएशन द्वारा कसोल व मणिकर्ण से साडा को हटाने के बारे में प्रदेश सरकार के समक्ष भी मामला उठाया था और इस बाबत उनकी फाइल भी कैबिनेट में अटकी हुई है। 
लेकिन उस पर भी कोई उचित कार्रवाई नहीं हो पाई है। कसोल व मणिकर्ण दोनों की ही भौगोलिक स्थिति काफी विकट है ऐसे में युवाओं को बेरोजगारी से बचाने के लिए उन्हें पंजीकरण में विशेष छूट दी जानी चाहिए। वहीं, माननीय हाईकोर्ट द्वारा जो गैर पंजीकृत होटलों के बिजली व पानी के कनैक्शन काटने के निर्देश जारी किए गए हैं उससे घाटी के पर्यटन कारोबार को भी काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि कसोल में बहुत होटल पंजीकृत है और वो प्रशासन की सभी शर्तो को भी पूरा कर रहे हैं लेकिन बार-बार कसोल का नाम आने के चलते क्रिसमस व न्यू ईयर की होटलों की बुकिंग भी रद्द हुई है। ऐसे में अगर युवा बेरोजगार होते है तो वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए गलत राह पकड़ सकते है। युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को पंजीकरण में सरलता लानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कसोल व मणिकर्ण का पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह से ठप्प हो चुका है। ऑन लाइन बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। ऐसे में यदि यहां का पर्यटन व्यवसाय बंद हो जाता है तो यहां के युवा बेरोजगार हो जाएंगे। कई लोगों ने सरकार द्वारा वन टाइम सेटलमैंट पॉलिसी के तहत भी आवेदन किया है। यदि यह पॉलिसी लागू की जाए तो इससे भी बहुत सारे होटल पंजीकृत होंगे। उन्होंने कहा कि होम स्टे के तहत भी बहुत सारे घरों में पर्यटन कारोबार चला हुआ है लेकिन साडा के कारण यह भी पंजीकृत नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि साडा के तहत लोगों को विशेष छूट दी जाए और इन गांवों से साडा को हटाया जाए क्योंकि यहां की भोगौलिक स्थिति साडा लगाने की नहीं है। उन्होंने कहा कि साडा लगाने बाद सरकार ने सुविधा भी कोई नहीं दी है न तो सीवरेज और न ही कूड़ा सयंत्र की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि कसोल व मणिकर्ण में भूमि कम होने के कारण साडा की प्रक्रिया को आम जनता व होटलियर पूरी नहीं कर पा रहे हैं। जिस कारण यहां के होटल अवैध घोषित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कसोल व मणिकर्ण को गांव की श्रेणी में रखना चाहिए और गांव के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार व प्रशासन को प्रयास करने चाहिए।