विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में ट्रैप कैमरे में कैद हुआ स्नो लैपर्ड

कमलेश वर्मा(परी), कुल्लू,11दिसंबर। विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में पहली बार स्नो लैपर्ड दिखाई दिया है।कुल्लू ज़िला की तीर्थंन घाटी में फैले ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी ) में हालांकि इससे पहले भी कई बार इसके पाए जाने के निशान पार्क क्षेत्र में देखे गए थे लेकिन पहली बार स्नो लैपर्ड पार्क क्षेत्र में लगाए गए कैमरे में कैद हो गया है। गौर रहे कि पार्क प्रबंधन और वाइल्ड लाइफ संस्थान देहरादून द्वारा पार्क क्षेत्र में जगह जगह ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं ताकि पार्क क्षेत्र में दुर्लभ जीव जंतुओं के बारे में जानकारी मिल सके। ट्रैप कैमरे में पहली बार ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में हिम तेंदुआ घूमता हुआ नजर आ रहा है। इन दिनों वाइल्ड लाइफ संस्थान देहरादून के शोधार्थी भी पार्क क्षेत्र में जीव जंतुओं पर शोध कर रहे हैं। जानकारी देते हुए ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के निदेशक आरएस पटियाल ने बताया कि तीर्थन घाटी के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र में पहली बार रिसर्च कर रहे छात्र के ट्रैप कैमरे में बर्फानी तेंदुआ की तस्वीर कैद हुई है। गौर रहे कि बर्फीले तेंदुए विलुप्त हो रहे हैं और यह जानवर हिमाचल का राज्य पशु भी है। दुनियाभर में इनकी तादाद बेहद कम रह गई है। इस प्रजाति का अस्तित्व अवैध शिकार और अनुकूल रिहायशी इलाके खत्म होने के चलते खतरे में हैं। 20वीं सदी में हिम तेंदुए का नाम लुप्त प्राय पशुओं की उस लाल पुस्तिका में शामिल कर लिया गया है, जिसे प्रकृति संरक्षण संबंधी अंतरराष्ट्रीय संघ की लाल किताब कहा जाता है। इसके अलावा इस हिम तेंदुए को रूस और अन्य देशों की भी ऐसी ही लाल किताबों में शामिल किया गया है। सन् 2014 में हिम तेंदुओं के शिकार पर पूरी दुनिया में प्रतिबंध लगा दिया गया है।
तीर्थन घाटी स्तिथ ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में पहली बार ट्रैप कैमरे में हिम तेंदुआ की तस्वीर कैद हुई है। पार्क क्षेत्र में देहरादून संस्थान के छात्र भी शोध कर रहे हैं। शोध कर रहे एक छात्र को ट्रैप कैमरे में स्नो लैपर्ड नज़र आया है।
आर एस पटियाल, निदेशक ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को विश्व धरोहर का दर्जा मिल गया है। कुल्लू ज़िला के इस नेशनल पार्क पर यूनेस्को की विश्व धरोहर टीम ने मुहर लगाई है। 15 से 25 जून को कतर के दोहा में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शिक्षण वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संघ) टीम की बैठक में विश्व के 32 प्रस्तावों पर मंथन हुआ है। कालका-शिमला रेलवे लाइन के बाद यह दूसरी धरोहर बन गई है, जिसे यह दर्जा मिला है। वर्ष 2012के मार्च में यूनेस्को ने ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को इसके लिए नामांकित किया था। इसके बाद संबंधित टीम ने डॉ. बॉरबाय के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश दौरे के लिए पहुंची और कई मामलों में नए सिरे से रिपोर्ट सौंपने को कहा। 22 नवंबर2013 को मांगे गए हर पहलू पर राज्य सरकार ने इसे विश्व धरोहर घोषित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया। दोहा में हुई बैठक में इसके लिए वन विभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल आरके गुप्ता ने प्रस्तुति दी।
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की विशेषताएँ
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क 90,540 हेक्टेयर में फैला है। पार्क का 754.4 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र कोर जोन, 265.6 वर्ग किलोमीटर ईको जोन में व 61 वर्ग किलोमीटर तीर्थन वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी व 90 किलोमीटर वर्ग का क्षेत्र सैंज सेंक्चुअरी में आता है। पार्क 1,171 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।पार्क में पर्वत श्रृंखला रखुंडी टॉप, घुमतराओ, तीर्थन, पातल, मुझोणी, खोलीपोई, चादनीथाच आती हैं।ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में विभिन्न प्रजाति के वन्य प्राणी काला भालू, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, बर्फीला तेंदुआ, घोरल के अतिरिक्त मुर्ग प्रजाति के अति दुर्लभ पक्षी जाजुराना व मोनाल, कोकलास सहित पशु-पक्षियों की कुल तीन सौ प्रजातियां पाई जाती हैं। तेंदुओं की भी यहां भरमार है।विभिन्न प्रजातियों के औषधीय पौधों की सुगंध यहां आने वालों को अपनी ओर आकर्षित करती है। नौ तरह के मेंढक की भांति पानी और जमीन पर रहने वाले एम्फीबियंस का घरौंदा है।ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में सांप की 12 और पक्षियों की तीन ऐसी प्रजातियां भी यहां पर हैं जो विश्व में खत्म होने के कगार पर हैं। इन्हें रेड डाटा बुक में विलुप्त प्राय: प्रजाति में घोषित किया जा चुका है।30 से अधिक स्तनधारियों की प्रजातियां, इसके अलावा300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों का घर,सैकड़ों दुर्लभ पशुओं का बसेरा,पश्चिमी ट्रैगोपैन के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थल,भूरे भालू, औबेक्स, काले भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुए व हिमालयन थार की दुर्लभ प्रजातियां,चंदवा वन, ओक जंगल, अल्पाइन झाड़ियां, उप अल्पाइन समुदायों और अल्पाइन घास,बैरबैरिस, इंडिगोफेरा, सारकोकोआ और वाईबर्नम क्षेत्र में देखी जाने वाली वनस्पति,दुर्लभ प्रजाति के सुगंधित और औषधीय गुणों से भरपूर पौधे हैं।