उक्रांद ने किया सीएम आवास कूच

देहरादून। उत्तराखंड क्रान्ति दल के महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री ने परेड ग्राउंड से सीएम आवास कूच किया। कूच के दौरान प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने कनक चौक पर बैरिकेटिंग लगाकर रोक दिया। इसके बाद वही धरने पर डट गए। प्रदर्शनकारियों ने जैसे ही आगे बढऩे का प्रयास किया तो पुलिस ने उन्हें वहीं बिठा लिया। गौरतलब है कि महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री ने कहा कि राजधानी व उसके आसपास के क्षेत्रों में कुछ समय से जनलक्ष्मी फाइनेंस सर्विसेज के नाम से एक संदिग्ध कंपनी द्वारा जनता को लुभावने वादों के साथ रुपए देने का व्यापार किया जा रहा है। कंपनी हजारों निर्धन परिवारों को अपना निशाना बना चुकी है। उल्लेखनीय है कि उक्त फाइनेंस कंपनी द्वारा गरीब जनता को पिछले कुछ वर्षों में अंधाधुंध तरीके से पैसा बांटा गया। ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी द्वारा पैसा बांटते वक्त मानकों का पालन नहीं किया गया। बगैर किसी प्रतिभूति या हैसियत का आंकलन करे बगैर निर्धन लोगों को रुपया बांटा गया। परिणाम स्वरुप हजारों लोग कंपनी के मुंह मांगे ब्याज को चुकाने में असमर्थ हो गए। नोटबंदी के दौरान कंपनी द्वारा लोगों को मोबाइल में संदेश भेजा गया। जिसमें कंपनी का लाइसेंस निरस्त होने के कारण लोगों से किसी भी एजेंट हो किस्त ना अदा करने का फरमान जारी किया गया। किंतु कुछ माह बाद अचानक राज्य से बाहरी क्षेत्र के कुछ बदमाश किस्म के लोग बकाएदारों से घर में घुसकर बकाया राशि की ब्याज सहित मांग करने लगे। निर्धन बकायेदारों द्वारा एकमुश्त इतनी रकम की व्यवस्था ना कर पाने की स्थिति में उक्त कंपनी के कथित एजेंट गुंडागर्दी व गाली गलौज करने पर आमादा हो जाते हैं। उल्लेखनीय है कि अंधाधुध तरीके से रुपया बांटे जाने के क्रम में कुछ निर्धन परिवारों से कागजातों में साइन करा लिए गए लेकिन कंपनी के एजेंटों द्वारा लोन राशि जो कि कार्ड के साथ दी जाती थी,उसका कार्ड ऋण के आवेदकों से यह कह कर ले लिया कि हम आप को बैंक से नकद रुपया निकाल कर दे देंगे। ऐसे आवेदकों के साथ भी ऋण वसूली की जा रही है। पीडि़तों ने बताया गया कि कंपनी का संचालन किसी शीला नामक महिला के द्वारा किया जाता है। पीडि़त परिवारों में से कुछ परिवारों ने जब ऋण वसूली के लिए घर आने वाले गुंडों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करनी चाहि तो पुलिस द्वारा दी पीडितों की कोई सहायता नहीं की गई। जबकि कानून घर में घुसकर गुंडागर्दी के माध्यम से ऋण वसूली की इजाजत नहीं देता। उक्त कंपनी द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं के ग्रुप बनवाकर रूपया बांटा जाता है तथा किसी भी ऋण आवेदक द्वारा रुपया अदा ना कर पाने की स्थिति में पूरे ग्रुप द्वारा मिलकर उस महिला का ऋण अदा करवाने की शपथ दिलाई जाती है। फाइनेंस कंपनी की ऐसी अजीबोगरीब नियमों से अक्सर गली मोहल्ले में निर्धन परिवारों के बीच लड़ाई झगड़ों की स्थिति उत्पन्न होती रहती है तथा राजधानी में ऐसी संदिग्ध फाइनेंस कंपनियों के कारण किसी बड़े धोखाधड़ी कांड का अंदेशा बना रहता है। उन्होंने जिलाधिकारी से शिकायत की कि शासन स्तर से ऐसी संदिग्ध कंपनियों पर निगरानी बनाते हुए उचित कार्यवाही की किए जाने की मांग की साथ ही कंपनी के सीमाद्वार स्थित कार्यालय पर कानूनी कार्यवाही की जाने की मांग की।