देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के विलय का ऐलान, बैंकिंग सुधार के लिए सरकार ने कसी कमर
सरकार ने देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा का विलय किए जाने की घोषणा की है। देश की बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के लिए सरकार ने तीनों सरकारी बैंकों को मिलाकर एक करने का फैसला लिया है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई आर्थिक समीक्षा बैठक के बाद वित्तीय मामलों के सचिव राजीव कुमार ने मीडिया को बताया कि सरकार विलय के बाद बनने वाले बैंक को पूंजीगत सहायता देती रहेगी।
राजीव कुमार ने कहा, ‘हमने देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा का मिलाने का फैसला किया है। इस विलय के बाद देश का तीसरा बड़ा सरकारी बैंक सामने आएगा।’
गौरतलब है कि सरकार ने बजट पेश करने के दौरान बैंकों के एकीकरण का खाका पेश किया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बैंकों के एकीकरण का फैसला हमारे एजेंडे के मुताबिक है और इस दिशा में पहले कदम की घोषणा की गई है।
उन्होंने कहा, ‘किसी भी कर्मचारी को विलय की वजह से किसी प्रतिकूल स्थिति का सामना करना नहीं पड़ेगा। सभी कर्मचारियों के लिए बेहतरीन सेवा शर्ते बहाल होंगी।’
गौरतलब है कि देश की बैंकिंग व्यवस्था के सामने एनपीए की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कुमार ने कहा कि विलय के प्रस्ताव को तीनों बैंकों के निदेशक मंडल को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की बैंकिंग व्यवस्था में सुधार की जरूरत है और सरकार बैंकों की पूंजीगत जरूरतों का ख्याल रख रही है। विलय तक तीनों बैंक स्वतंत्र रूप से काम करते रहेंगे।
फिलहाल देश में सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है। इसके बाद दूसरे और तीसरे नंबर पर एचडीएफसी और आईसीआईसीआई का नंबर आता है, जो निजी क्षेत्र के बैंक हैं।