सर्जिकल स्ट्राइक छद्म युद्ध चलाने वालों को मुंहतोड़ जवाब: मोदी
नई दिल्ली। सर्जिकल स्ट्राइक के दूसरी वर्षगांठ के अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ में तीनों सेनाओं की वीरता की जमकर तारीफ की। वैसे तो प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन साफ कर दिया कि सर्जिकल स्ट्राइक देश के खिलाफ आतंकवाद की आड़ में छद्म युद्ध चलाने वालों का मुंहतोड़ जवाब था। यही कारण है कि सर्जिकल स्ट्राइक के वर्षगांठ पर ‘पराक्रम पर्व’ सवा सौ करोड़ देशवासी शामिल हुए और उन्हें सेना के पराक्रम को जानने का मौका मिला।
प्रधानमंत्री के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक से साफ हो चुका है कि अब ‘हमारे सैनिक उन सबको मुंहतोड़ जवाब देंगे, तो हमारे राष्ट्र में शांति और उन्नति के माहौल को नष्ट करने का प्रयास करेंगे।’ उन्होंने कहा कि हम शांति में भरोसा रखते हैं और उसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध भी हैं, लेकिन देश की संप्रभुता की कीमत पर नहीं। उन्होंने याद दिलाया किस तरह हमारे सैनिकों ने दूसरे विश्व युद्ध से लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति मिशनों तक में दुनिया में अमन और शांति लाने के लिए बहादुरी दिखाई है।
लंबे समय से वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी और मौजूदा सरका के राफेल खरीद पर विपक्ष के आरोपों के बीच प्रधानमंत्री ने भारतीय वायुसेना को दुनिया में 21वीं सदी की सबसे साहसिक और शक्तिशाली वायुसेना बताया। पाकिस्तान के साथ तीन लड़ाइयों से लेकर 1999 के कारगिल युद्ध तक में वायुसेना के पराक्रम का जिक्र करत हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आसमान में अपनी ताकत के बल पर यह हमें सुरक्षा का अहसास दिलाता है। उन्होंने वायुसेना में महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन का रास्ता खोले जाने का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने दो अक्टूबर को जन्मदिन के मद्देनजर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को भी याद किया। उन्होंने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर लोगों से खादी के कपड़े खरीदने की भी अपील की। दुनिया में महात्मा गांधी के विचारों के प्रभावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डा. मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला जैसी विभूतियों ने भी गांधी के विचारों से शक्ति पाई।
स्वच्छता के प्रति महात्मा गांधी के आग्रह को याद करते हुए पीएम ने पिछले दिनों स्वच्छ भारत मिशन के अपने कार्यक्रम भी जानकारी दी। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विशेषता थी कि वह बाहर से काफी विनम्र दिखते थे, लेकिन भीतर से चट्टान की तरह दृढ़ थे। ‘जय जवान जय किसान’ का उनका नारा उनके इसी विराट व्यक्तित्व की पहचान है। उन्होंने 31 अक्टूबर सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के अवसर लोगों से ‘रन फॉर यूनिटी ‘ में बढ़-चढ़ हिस्सा लेने की अपील की।