मौजूदा मंत्रियों पर मंडरा रहा हार का खतरा, नए चेहरें पर दाव लगा सकती है बीजेपी

पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल राज्य में ऐसे विधायकों को टिकट नहीं देने के पक्ष में हैं जिनका रिपोर्ट कार्ड अच्छा नहीं है और उनके पास चुनाव जीतने की संभावनाएं बहुत ही कम हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा के विधायक की संख्या 165 है और पार्टी 42 प्रतिशत विधायकों का टिकट काटना चाहती है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की पूरे देश में 30 से 40 प्रतिशत उम्मीदवारों को बदल कर नए चेहरे मैदान में उतारने की योजना है। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लगता है कि पार्टी का ये कदम राज्य में पार्टी को चुनावी नुकसान पहुंचा सकता है। असल में मुख्यमंत्री इस बात से चिंतित हैं कि पिछले 10-15 सालों में मध्यप्रदेश के कई नेताओं का कद बढ़ा है और ऐसे में उन्हें टिकट नहीं देने से न केवल उस सीट पर बल्कि पार्टी को अन्य सीटों पर भी नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन पार्टी नेतृत्व राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी की घटती संभावना से चिंतित है। सूत्रों का कहना है की इस बार कई मंत्रियों के हारने की संभावना है इसलिए योजना है कि उनकी जगह नए चेहरों को मैदान में उतारा जाए।

अमित शाह की रिपोर्ट होगी सबसे महत्वपूर्ण
भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार टिकट वितरण में अमित शाह की रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण होगी। दरअसल, शाह प्रदेश संगठन, सौदान सिंह और शिवराज सिंह चौहान की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार करवा रहे हैं, साथ ही अपने स्तर पर सभी 230 सीटों का सर्वे करा रहे हैं। उसके बाद चारों सर्वे रिपोर्ट के आधार पर एक सूची तैयार होगी जिसके आधार पर टिकटों का वितरण होगा। भाजपा सूत्रों की मानें तो शाह के जो सिपहसलार सर्वे कर रहे हैं वे भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि अगले चुनाव में भाजपा यदि शिवराज सरकार के मौजूदा सभी मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारती है तो फिर आधे से ज्यादा मंत्रियों पर हार का खतरा रहेगा। हालांकि इनमें से 8 से 10 मंत्री चुनाव नहीं लड़ेंगे। वे अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट मांग सकते हैं। जिन मंत्रियों की चुनाव क्षेत्र में पकड़ ढीली हो रही है, उनमें माया सिंह, हर्ष सिंह, सूर्यप्रकाश मीणा की हालत सबसे ज्यादा खराब है। जबकि जयभान सिंह पवैया, लाल सिंह आर्य, ललिता यादव, कुसुम महदेले, शरद जैन, जालम सिंह पटेल, सुरेन्द्र पटवा, गौरीशंकर शेजवार, रामपाल सिंह, बालकृष्ण पाटीदार एवं अंतरसिंह आर्य की परफार्मेंस भी सही नहीं है। इनमें से कुछ मंत्री अपना चुनाव क्षेत्र बदल सकते हें तो कुछ अपने परिचितों को चुनाव लड़ा सकते हैं।

शाह का मिशन साफ हर हाल में बने सरकार
अमित शाह ने मिशन 2018 का जो रोडमैप तैयार किया है, उसका लक्ष्य साफ है हर कीमत पर मध्यप्रदेश में सरकार बनाना। शाह विधायकों के सर्वे और संगठन द्वारा तैयार खुफिया रिपोर्ट कार्ड की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। संघ, संगठन, सरकार की रिपोट्र्स और विधानसभा सीट की वर्तमान स्थिति को देखते हुए शाह 138 सीटों पर नजर रखे हुए हैं। दरअसल, 24 जिलों की इन 138 सीटों में से कुछ वह विधानसभा क्षेत्र हैं जहां पिछले चुनाव में भाजपा कम मार्जिन से जीती थी, वहीं कुछ सीटें वे हैं जहां कांग्रेस भाजपा पर भारी पड़ेगी, कुछ सीटों पर उम्रदाराज नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा और कुछ सीटें वह हैं जहां मंत्रियों और विधायकों का जनाधार कम हो रहा है।

ये सीटें हैं
विजयपुर, जौरा, मुरैना, दिमनी, अम्बाह, अटेर, भिंड, लहार और मेहगांव, ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर ईस्ट, भितरवार, डबरा, सेवढ़ा और भांडेर, करेरा, पोहरी, पिछोर, कोलारस, बमोरी और राघौगढ़, अशोक नगर, चंदेरी, मुंगावली, खुरई, सुरखी, सागर, देवरी और बंडा, टीकमगढ़, जतारा, पृथ्वीपुर, खरगापुर, चांदला, राजनगर, छतरपुर, मलहेरा, दमोह, जबेरा, हटा, पवई, गुन्नौर, पन्ना, चित्रकूट, रैगांव, अमरपाटन, रामपुर बघेलान, सिरमौर, सेमरिया, मउगंज, देवतालाब, मनगवां और गुढ़, चुरहट, सीधी और सिंहावल, चितरंगी, ब्यौहारी, कौतमा, अनूपपुर, बांधवगढ़, बड़वारा, विजयराघवगढ़, पाटन, बरगी, जबलपुर ईस्ट, जबलपुर वेस्ट, सिहोरा, डिण्डोरी, मण्डला, बैहर, लांजी, परसवाड़ा, बालाघाट, बरघाट, सिवनी, केवलारी, लखनादौन, अमरवाड़ा, सौंसर, परासिया और पाण्डुर्ना, घोड़ाडोंगरी, टिमरनी, हरदा, सिवनी मालवा, सांची, बासौदा, कुरवाई, सिरोंज, शमशाबाद, भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य, आष्टा, इछावर, सीहोर, नरसिंहगढ़, व्यावरा, खिलचीपुर, सुसनेर, शाजापुर, शुजालपुर, सोनकच्छ, मंधाता, भीकनगांव, बड़वाह, महेश्वर, कसरावद, खरगोन, भगवानपुरा, राजपुर, पानसेमल, बड़वानी, अलीराजपुर, जोबट, थांदला, पेटलावाद, सरदारपुर, धार, गंधवानी, कुक्षी, मनावर, धरमपुरी, बदनावर, राउ, उज्जैन नार्थ, उज्जैन साउथ, सैलाना, आलोट, मल्हारगढ़, सुवासरा, मनासा, नीमच, जावद, गोटेगांव, नरसिंहपुर।

हर क्षेत्र में तीन नए चेहरों का पैनल
बताया जा रहा है कि शाह के निर्देश पर पार्टी हर क्षेत्र में तीन नए चेहरों का पैनल बनवा रही है। भाजपा ने अपने सर्वेक्षण में वर्तमान विधायक, संभावित नए चेहरों और भाजपा में अन्य पार्टियों से आए विधायकों के लिए भी कुछ मापदंड निर्धारित किए हैं। ये मापदंड भी टिकट मिलने या कटने का आधार बनेगा। सीधी-सी बात यह है कि भाजपा इस बार सिर्फ उन्हीं चेहरों पर दांव लगाएगी जो पार्टी के खांचे में फिट बैठेंगे और जिनके जीतने के आसार शत-प्रतिशत होंगे। पार्टी इस बार कोई भी रिस्क लेकर चुनाव मैदान में उतरने के मूड में नहीं है। उम्मीदवारों की छवि को प्रभावित करने वाले कारकों को भी परखेगी। शाह ने टिकट का क्राइटेरिया फाइनल कर दिया है। जिसमें 5 और छह बार चुनाव जीत चुके विधायकों की जगह नए चेहरे को उतारा जाए और वह चेहरा मौजूदा विधायक की पसंद से ही तय कर लिया जाए। सूत्रों का मानना है कि लगभग आधा दर्जन से कम मंत्रियों का कामकाज सरकार और संगठन की रिपोर्ट में कमजोर आंका गया है। भाजपा मध्यप्रदेश में पिछले दो विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काट चुकी है। पार्टी ने 2008 में 41 और 2013 में 54 विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया था, जिसका फायदा भी उसे मिला। ज्यादातर उन विधायकों को चुनाव मैदान में नहीं उताया गया था, जिनके खिलाफ एंटी इनकमबेंसी थी या जिनकी जीतने की संभावना नहीं थी। जाहिर है आने वाले चुनाव में भी पार्टी बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट से वंचित कर सकती है। भाजपा विधायकों की शुरूआती रिपोर्ट में आए नकारात्मक नतीजों को लेकर सत्ता और संगठन में पहले ही हडक़ंप भी मच चुका है। चंबल, विंध्य और बुंदेलखंड के अलावा मालवा क्षेत्र के भी कई भाजपा विधायकों की रिपोर्ट बहुत कमजोर आई। यही कारण है कि पार्टी ने निश्चय कर लिया है कि सदाशयता के आधार पर किसी को टिकट नहीं दिया जाएगा। यदि संगठन के जिम्मेदार लोगों की बात पर भरोसा किया जाए तो करीब 100 वर्तमान विधायक (जिनमें मंत्री भी शामिल हैं) के टिकट निशाने पर हैं। जिसका टिकट कटेगा भविष्य में उसकी भूमिका को भी परखा जाएगा। शाह की रणनीति के अनुसार कांग्रेस के जो विधायक जीतने की स्थिति में हैं उन्हें भाजपा में लाने की कवायद की जाए। ऐसे लोगों को टिकट भी दिया जाए। पार्टी का यह प्रयोग उत्तरप्रदेश में सफल रहा है। यही वजह है कि मप्र में भी इसे ही लागू किया जाएगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री के स्तर पर, निजी संस्था द्वारा, जन अभियान परिषद और इंटेलीजेंस के आधार पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर सर्वे हो रहा है। इसमें वर्तमान विधायकों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी देखी जा रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और गैर भाजपाई व्यवस्था से फीडबैक लिया जा रहा है। इसके बाद इनका निचोड़ निकालकर नामों की सूची तैयार होगी। इसके बाद चुनाव समिति की बैठक होगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े में चुनाव समिति की बैठक का कार्यक्रम है।

संघ की ताजी रिपोर्ट पर रहेगी नजर
विधानसभा चुनाव को लेकर संघ की ताजी रिपोर्ट पर भी भाजपा नेताओं की नजर रहेगी। भाजपा के आला नेताओं ने बताया कि संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की सभी 230 विधानसभा सीट का ग्राउंड सर्वे किया है। बताया जा रहा है कि संघ की ताजा रिपोर्ट में क्या बदलाव आया है, यह टिकट बंटवारे में खासा मायने रखेगा। भाजपा के आला नेताओं ने बताया कि अमित शाह समयदानी कार्यकतार्ओं की भी रिपोर्ट लेंगे। इसमें बूथ स्तर पर तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही कमजोर बूथ को मजबूत करने के लिए चुनावी टिप्स भी देंगे। प्रदेश की 230 विधानसभा में समयदानी प्रभारी बनाए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत के सामने पेश करेंगे।

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