आखिर अजय सिंह पर क्यों एक शब्द भी नहीं बोला अमित शाह ने!

उमा शंकर तिवारी

सीधी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मध्यप्रदेश में बीजेपी के प्रत्याशियों के प्रचार के लिए तूफानी यात्रा कर रहे है। इसी तूफानी यात्रा के 40 मिनट का एक पड़ाव कांग्रेस के गढ़ चुरहट में रहा। काफी दूर दराज के क्षेत्रों से पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुखारबिन्दु से कुछ नया सुनने की आस में चुरहट में जुटे। पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने 27 मिनट के भाषण में रामायण पाठ करते ही नजर आये।
रविवार को भारतीय जनता पार्टी के चाणक्य अमित शाह अर्जुन सिंह की धरा पर कांग्रेस के अभेद्य किले को ढहाने के उद्देश्य से चुरहट के मोहनी देवी स्टेडियम में जनता के बीच अपनी बात रखी। अभिवादन के बाद शुरू हुआ अमित शाह का रामायण पाठ का ज्यादा वक्त तो नेहरू खानदान को कोसने में निकल गया। कभी इंदिरा को कोसा तो कभी राजीव को। सोनिया और राहुल गांधी की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बारे में भी कुछ बातें बता दी। कांग्रेस को युद्ध के मैदान में खड़ी ऐसी फौज बताया जिसका कोई सेनापति ही नहीं है।
कांग्रेस पार्टी अपने पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी और पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव के साथ क्या किया इस पर भी दो लाइन बोल दी, बाकी समय मोदी सरकार की नीति के यशोगान में गुजरा। बचे कुछ समय में मध्यप्रदेश सरकार के बारे में बताते रहे कि किस तरह से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बीमारू मध्यप्रदेश को विकसित मध्यप्रदेश बनाया है। इसमें 15 वर्षों के बिजली देने के घंटे, सीधी जिले में लगभग डेढ़ लाख घरों में शौचालय बनाना, 24000 लोगों को छत उपलब्ध कराना, एक रुपये किलो की दर से गरीबों को अनाज उपलब्ध कराना आदि। इसके अलावा एक सांस में 15 योजनाओं के नाम भी रटंत तोता की तरह गिना दिए। कुल मिलाकर सरकार के विकास कार्यों की पूरी झांकी खींच दी। साथ ही कुछ तीर कमलनाथ पर भी छोड़ दिये। भाषण में एक दो बार लड़खड़ाए भी। अपने पीए को संदेश भी दिया। अंत में पार्टी प्रत्याशियों के साथ मंच से हाथ हिलाकर 28 नवम्बर को कमल का बटन जरा जोर से दबाने की अपील भी की। कुल मिलाकर जिस काम को करने आये थे उसे पूरा कर गए। पर यहां एक सवाल रह जाता है।

चुरहट के राहुल भैय्या पर कुछ न बोलने के सियासी मायने?

राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कांग्रेस का किला ढहाने चुरहट आये और किले पर कब्जा जमाए अजय प्रताप सिंह यानि विन्ध्य के राहुल भैय्या पर कुछ नहीं बोले। अजय प्रताप सिंह मध्यप्रदेश की राजनीति में कोई छोटा नाम भी नहीं है कि राष्ट्रीय स्तर का नेता उन पर कुछ शब्द बोलने पर अपनी प्रतिष्ठा पर आंच समझता हो, विन्ध्य भूमि में इस नाम की अपनी एक अलग हनक है ये सबको पता है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह पर कुछ न बोलने के बड़े सियासी मायने देखे जा रहे हैं। वैसे क्षेत्र में दबदबा रखने वाले बीजेपी के एक बड़े नेता ने नेशनल फ्रंटियर से बातचीत में बताया कि पार्टियां कुछ सीटें विपक्ष के लिए भी छोड़ देती है। इसे सत्ता मैनेजमेंट के तौर पर देखा जा सकता है। कहीं वो कमजोर प्रत्याशी उतार देती है तो कहीं अपने ही दल का समर्थन जोर से नहीं करती। अब बीजेपी के इन नेता का इशारा किस ओर था ये 28 नवम्बर को ही पता चलेगा। फिलहाल राहुल भैय्या के ऊपर कुछ न बोलने से बीजेपी के स्थानीय समर्थकों को थोड़ी निराशा जरूर हुई।

15 मिनट की गुप्त मीटिंग के मायने

जैसे ही अमित शाह का मंच से भाषण शुरू हुआ, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने सीधी जिलाध्यक्ष राजेश मिश्रा को बुलाकर अपने साथ ले गए। राकेश सिंह का सीधी आना और गुप्त मीटिंग करना कुछ गहरे संकेत देता है। वैसे भी अमित शाह जहां भी प्रचार के लिए जाते है वहा के प्रचार मैनेजमेंट पर पूरा ध्यान देते है।

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