केंद्र सरकार के गुलाम हैं जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल : फारूक अब्दुल्ला

श्रीनगर :  जम्मू-कश्मीर नैशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने विधानसभा भंग करने के फैसले को लेकर गवर्नर सत्यपाल मलिक को जमकर निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि वह (सत्यपाल मलिक) केंद्र सरकार के ‘गुलाम’ बनकर रह गए हैं। बुधवार शाम को पीडीपी के नैशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस से गठबंधन कर सरकार बनाने की सुगबुगाहट के बीच ही सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग करने का ऐलान कर दिया था।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘मुझे इन राज्यपाल से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन यह बहुत बुरा हुआ है। वह केंद्र सरकार के गुलाम बनकर रह गए हैं। गवर्नर के पद पर फिर से विचार किए जाने की जरूरत है। विधानसभा भंग करने के लिए उन्होंने 5 महीने इंतजार क्यों किया?’

बीजेपी महासचिव राम माधव द्वारा कथित तौर पर पीडीपी और एनसी के गठबंधन को ‘पाकिस्तान प्रायोजित’ करार दिए जाने पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘पीडीपी जब तक बीजेपी के साथ गठबंधन में थी तब तक वह आतंकवाद फ्रेंडली नहीं थी। कांग्रेस और एनसी के साथ गठबंधन की बात करने पर वह आतंकवाद फ्रेंडली हो गई?’

बता दें कि बुधवार को जम्मू-कश्मीर में गैर बीजेपी दलों की सरकार बनाने की कोशिशों के बीच राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी थी। इसके बावजूद कांग्रेस, पीडीपी और एनसी सरकार बनाने के लिए तैयार हैं और राज्यपाल के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

गवर्नर ने बताई विधानसभा भंग करने की यह वजह
विधानसभा भंग करने के अपने फैसले पर सत्यपाल मलिक ने सफाई देते हुए कहा मैंने किसी के साथ पक्षपात नहीं किया। उन्होंने खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए कहा कि विधायकों को धमकाया जा रहा था। खुद पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने शिकायत की थी। गवर्नर सत्यपाल ने कहा, ‘जिस दिन से मैं गवर्नर पद पर नियुक्त हुआ हूं उसी दिन से कहता आया हूं मैं राज्य में किसी ऐसी सरकार का पक्ष नहीं लूंगा जिसमें बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त हुई हो। इसके बजाय मैं चाहता हूं कि चुनाव हों और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार बने।’

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