अयोध्या में धारा 144 सिर्फ मुसलमानों के लिए, बीजेपी-आरएसएस और शिव सेना के लिए नहीं? – आजम खान

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर आयोजित की गई धर्म सभा को लेकर यूपी सरकार ने धारा 144 लागू कर रखी थी. लेकिन उसके बावजूद भी भीड़ इस आयोजन में पहुंची. धारा 144 के खुलेआम उल्लंघन को लेकर यूपी के पू्र्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने कहा कि अयोध्या में धारा 144 सिर्फ मुसलमानों के लिए लगी है. बीजेपी आरएसएस और शिव सेना के लिए नहीं? उन्होंने कहा कि मुस्लिम अयोध्या छोड़कर चले गए, तो खाली हो गया. अंग्रेज़ों ने धारा 144 बनाई थी, उस वक्त हिंदुस्तानी या अफ्रीका में कालों को गिरफ्तार किया जाता था. ये कानून कमज़ोरों के लिए है.

आज़म खान ने कहा, ‘उद्धव ठाकरे की पार्टी केंद्र सरकार में हिस्सेदार है. बाबरी मस्जिद को गिराने में केवल योगदान शिवसेना का है, सिर्फ उन्होंने ही इसकी शुरुआत की थी और आखिरी ईंट तक उन्होंने ही हटाई है. भारतीय जनता पार्टी ने तो सिर्फ श्रेय लेने की कोशिश की है जो कि उनको नहीं मिला.’

आजम खान ने आगे कहा, ‘अब जहां तक की मंदिर बनाने की बात है, जब गिराने में भी मुसलमान कहीं नहीं था तब भी पाबंदी थी और कुछ बहादुर लोग जमा हुए, यह शौर्य की बात है. सूरमा लोग जमे हुए डायनामाइट लेकर और उन्होंने एक बूढ़ी इमारत को गिरा दिया. कोई देखने वाला भी नहीं था, तो रोकने वाला कौन होता. बस पीएससी फौज रखवाली कर रही थी.’

तो उ.प्र. में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करें राज्यपाल : पीएसपीएलवहीं प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया (पीएसपीएल) ने भी अयोध्या में निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की ‘धर्म सभा‘ में भीड़ जमा किये जाने को लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए आज कहा कि अगर सरकार स्थिति को काबू नहीं कर पा रही है तो सूबे में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए.

पीएसपीएल प्रमुख शिवपाल सिंह यादव की अगुवाई में पार्टी के 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल ने राजभवन में राज्यपाल राम नाईक से मुलाकात करके उन्हें एक ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि उच्चतम न्यायालय में अयोध्या मामला लंबित होने के बावजूद कुछ संगठन अयोध्या में भीड़ लाकर देश और प्रदेश में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगाए जाने के बावजूद भीड़ का एकत्र होना राज्य और जिला प्रशासन की मंशा पर संदेह पैदा करता है.

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