आखिर किस दिशा में जा रहा है पंजाब!

नरेंद्र सांवरिया

कश्मीर में कमोबेश हालात वैसे ही बनते नजर आ रहे हैं, जैसे आतंकवाद के खात्मे से पहले पंजाब में बने थे। तब स्थानीय नागरिकों ने पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को आतंकवादियों की गतिविधियों और उपस्थिति की सटीक जानकारी देनी शुरू कर दी थी। नतीजा यह निकला कि जो काम बरसों के प्रयासों से नहीं हो पाया था, वह कुछ महीने के भीतर पूरा हो गया।

पंजाब को पूरी तरह आतंकवाद से मुक्त कर दिया गया। अब घाटी के उन क्षेत्रों के नागरिक भी आतंकवादियों और उनके सरगनाओं की सटीक जानकारी सैन्य अफसरों और पुलिस अधिकारियों को दे रहे हैं, जहां सबसे ज्यादा वारदातें हो रही हैं और जहां ये छिपने के ठिकाने बनाए हुए हैं।

सैन्य अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि खासतौर से जब से आतंकवादियों ने छुट्टी पर घर लौटने वाले सैन्यकर्मियों, अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस-एसपीओ वगैरा की हत्या कर उनके वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर लोगों में दहशत पैदा करने की मुहिम छेड़ी है,

तब से घाटी के लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच रहा है। पहले जब आतंकवादी किसी इलाके में शरण पाते थे और छिपते थे, तब लोग उनके बारे में चुप्पी साध लेते थे। सुरक्षाबल यदि उन्हें घेरकर समर्पण के लिए बाध्य करते थे अथवा मुठभेड़ में मौत के घाट उतारते थे,

तो कई बार अलगाववादियों के इशारे पर स्थानीय लोग प्रदर्शन और पत्थरबाजी कर विरोध पर उतर आते थे परंतु इधर उनके तौर तरीकों और आचरण में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। छोटे आतंकियों ही नहीं, बड़े सरगनाओं तक के लोकेशन की सटीक जानकारी लोग अब उपलब्ध करवा रहे हैं

और मुठभेड़ के दौरान विरोध भी नहीं कर रहे हैं। सैन्य बलों के खिलाफ प्रदर्शन और पत्थरबाजी में इधर के कुछ महीनों में कमी देखने को मिली है। लोगों से मिल रही जानकारी के परिणामस्वरूप मारे जाने वाले आतंकियों की संख्या में बढोत्तरी दर्ज की जा रही है।

अकेले नवंबर महीने में ही सुरक्षा बलों ने 32 आतंकियों को मार गिराया है। आतंकियों के खिलाफ इस कार्रवाई को सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। पंजाब में आतंकवादियों के खिलाफ आम लोगों की करीब-करीब बगावत की बड़ी वजह यह थी कि वो छिपते और खाते-पीते भी उन लोगों के यहां थे और उन्होंने उनकी इज्जत आबरू तक पर हाथ डालने की हिमाकत शुरू कर दी थी।

कई बार उन्होंने बेकसूर पंजाबियों को बेवजह मार डाला। लूटपाट तक करने लगे। कश्मीर में भी जब से आतंकियों ने सुरक्षाबलों में काम कर रहे युवाओं को निशाना बनाकर उनकी लाशों के वीडियो जारी करने शुरू किए हैं, तब से लोगों के दिलों से उनका खौफ निकल गया है।

अब वह आतंकियों के डर से बाहर निकलकर उनके सरगनाओं के बारे में जानकारी मिलने पर इसे सुरक्षाबलों के साथ साझा कर रहे हैं। लोगों की तरफ से आ रही जानकारी से साफ जाहिर है कि स्थानीय लोग भी उनसे तंग आ रहे हैं और उनके खिलाफ सुरक्षा बलों को जानकारी दे रहे हैं।

सुरक्षा बलों ने इस महीने अब तक 32 आतंकियों का सफाया किया है। अक्टूबर में 28, सितंबर में 29, अगस्त में 28 और जुलाई में 11 आतंकी मार गिराए। इस साल अब तक 226 आतंकी मारे गए हैं। पिछले साल 213 आतंकियों का और 2016 में 141 आतंकियों का सफाया किया था।

घाटी और एलओसी में इस साल हमारे 56 सैनिक शहीद हुए हैं। यह हालात बता रहे हैं कि कश्मीर भी तेजी से पंजाब के नक्शेकदम पर चल पड़ा है। केन्द्र सरकार की खुली छूट का ही नतीजा है कि सेना और दूसरे सुरक्षाबल घाटी से आतंकवाद को जड़ मूल से उखाड़ फेंकने के लिए कटिबद्ध हैं और वह वक्त दूर नहीं है, जब बारूद से भर दी गई घाटी फिर फूलों की खुशबू से महकती दिखाई देने लगेगी।

 

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