भारत-चीन का तुलनात्मक विश्लेषण US रिसर्चर्स के मुताबिक चीन से पारंपरिक धार में आगे है भारत

हार्वर्ड केनेडी स्कूल स्थित ‘बेलफर सेंटर फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल अफेयर्स’ की ओर से इस साल के शुरू में रिसर्च पेपर प्रकाशित किया गया. इसमें भारत और चीन के रणनीतिक संसाधनों के तुलनात्मक डेटा का विश्लेषण किया गया.
स्टडी ने एक नया डेटा संकलन पेश किया. ये डेटा संकलन “प्रकाशित खुफिया दस्तावेज, क्षेत्रीय राज्यों से हासिल निजी दस्तावेज और चीन- भारत और अमेरिका में स्थित विशेषज्ञों के साथ इंटरव्यू” पर आधारित है.
रिसर्च में अनुमान लगाया गया है कि चीन के सीमावर्ती इलाकों के पास भारत के कुल उपलब्ध स्ट्राइक फोर्स में सैनिकों की संख्या 2,25,000 है. इसकी तुलना में पश्चिमी थिएटर कमांड के तहत और तिब्बत, शिनजियांग मिलिट्री जिलों में चीनी ग्राउंड फोर्स 2,00,00 से 2,30,000 के बीच होने का अनुमान है. लेकिन फिर स्टडी में चीन के आंकड़ों को भ्रामक पाया गया.भारत के साथ युद्ध के दौरान भी इन बलों का खासा हिस्सा उपलब्ध नहीं होगा. या तो वो रूसी टास्क्स के लिए आरक्षित है या फिर शिनजियांग और तिब्बत में विद्रोह को काउंटर करने के लिए
स्टडी में कहा गया है कि- चीन की वेस्टर्न थियेटर कमांड इस क्षेत्र के सभी क्षेत्रीय स्ट्राइक एयरक्राफ्ट्स को कंट्रोल करती है. इनका एक अनुपात “रूस केंद्रित मिशन्स” के लिए रिजर्व रखे जाने की जरूरत है. चीन ने इस थियेटर में लगभग 101 चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान रखे हुए हैं. इसमें रूस केंद्रित डिफेंस भी शामिल है. दूसरी ओर भारत ने तुलना में 122 भारतीय समकक्ष तैनात कर रखे हैं जिनका निशाना सिर्फ चीन की ओर केंद्रित है.

india china
india china
स्टडी के मुताबिक भारतीय लड़ाकू पायलटों के पास असल नेटवर्क्ड लड़ाई के संस्थागत अनुभव का एक स्तर है. ऐसा इसलिए हैं क्योंकि वो पाकिस्तान के साथ जारी टकरावों की वजह से है. हालांकि चीन के पास एक बेहतर मिसाइल फोर्स है. लेकिन इनके PLAAF(चीनी वायु सेना) के डिसएडवांटेज से जुड़े पहलुओं से पार पाने की कम संभावना है.
LAC स्टैंड-ऑफ एक खुफिया विफलता,PLA (चीनी सेना) के इस तरह के एक बड़े मूवमेंट की भनक भारतीय और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पहले ही लग जानी चाहिए थी.
स्टैंड-ऑफ़ को समाप्त करने के संभावित समाधान के बारे में पूछे जाने पर, ओ’डॉनेल ने एक आक्रामक राजनयिक रणनीति का सुझाव दिया-
 चीन अपनी वैश्विक छवि, और वो कैसे दर्शाई जाती है, इसको लेकर बहुत संवेदनशील है.” ऐसे में जिन देशों का चीन पर प्रभाव है, उनसे चीन पर दबाव डलवाने के लिए कूटनीति से जुड़ी हर कवायद करनी चाहिए.
 चीन के सबसे करीबी पार्टनर होने के नाते रूस से कहा जाए कि वो उससे पीछे हटने के लिए कहने को हस्तक्षेप करे., रूस कथित तौर पर चीनी कार्रवाइयों से पहले से ही बहुत व्यथित है.
 पीएम नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से यह कह सकते हैं कि मौजूदा स्थिति में वो ये नहीं देख सकते कि चीन को कैसे न्योता दें, अगर वो भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर रहे हैं.’’ ओ’डॉनेल ने ध्यान दिलाया कि डोकलाम संकट 2017 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *