धामी कैबिनेट की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में सहकारिता, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कार्मिक, शहरी विकास और सैनिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर अहम निर्णय लिए गए।
देखें कैबिनेट द्वारा लिये गये अहम निर्णय-
1- राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 के अनुरूप राज्य में सहकारिता क्षेत्र के विकास हेतु उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति, 2026 प्रख्यापित किये जाने के सम्बन्ध में।
सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘सहकार से समृद्धि‘ की परिकल्पना को साकार करते हुए सतत् सहकारी विकास तथा देशभर में सहकारी आन्दोलन को नई दिशा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 तैयार की गयी है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य की भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़, प्रभावी बनाने जाने तथा राज्य के अन्तर्गत सहकारिता क्षेत्र के सतत् विकास हेतु राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के अनुरूप राज्य में एक सहकारिता नीति तैयार की जा रही है, जो सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, तकनीक सक्षम एवं व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने हेतु मार्गदर्शक दस्तावेज का कार्य करेगी।
भारत सरकार द्वारा दिनांक 24 जुलाई, 2025 को राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का अनावरण किया गया, जिसका उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि‘ के दृष्टिकोण को व्यवहारिक रूप देने के साथ-साथ सहकारिता क्षेत्र को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जोड़ना है। नीति के माध्यम से जहाँ एक ओर सहकारी संस्थाओं को अधिक सशक्त, पारदर्शी, पेशेवर, प्रतिस्पर्धी एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना है वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसरों को सृजित कर समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है। उक्त प्रस्तावित सहकारिता नीति का मुख्य उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम एवं सुदृढ़ बनाना, पारदर्शी एवं व्यावसायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन तथा पलायन से पुर्नवास की दिशा में ठोस पहल करना है।
उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति को राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अनुरूप राज्य की आवश्यकताओं एवं स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्रस्तावित नीति में प्रमुख रूप से सात रणनीतिक मिशन निर्धारित किये गये है, जिसमें नींव का सशक्तीकरण, जीवंतता को प्रोत्साहित करना, सहकारी संस्थाओं को भविष्य के लिए तैयार करना, समावेशिता तक पहुँच का विस्तार करना, नये एवं उभरते क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार करना, युवा पीढ़ी को सहकारी विकास हेतु तैयार करना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण शामिल है। अतः इन समस्त उद्देश्यों को पूर्ण किये जाने हेतु राज्य स्तर पर ‘उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति, 2026‘ को प्रख्यापित किये जाने का निर्णय लिया गया है।
2- वित्त (वे०आ०-सा०नि०) अनुभाग-07 की अधिसूचना संख्या-290/XXVII (7) 50(16) दिनांक 28 दिसम्बर, 2016 के द्वारा राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सरकारी सेवकों के वेतन निर्धारण हेतु प्रख्यापित ‘उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016‘ के साथ संलग्न अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स की तालिकायें निर्गत की गयी थी। प्रचलित वेतन मैट्रिक्स की तालिकाओं में लेवल-13 क के उपरान्त सीधे लेवल-15 एवं लेवल-16 का प्रावधान है, जबकि भारत सरकार में वेतन लेवल-13 क के पश्चात वेतन लेवल-14 एवं वेतन लेवल-15 अंकित है।
अतः उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016 के अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स में उल्लिखित वेतनमान रू0 1,44,200-2,18,200 के लिए वेतन लेवल-15 के स्थान पर वेतन लेवल-14 एवं वेतनमान रू0 1,82,200-2,24,100 के लिए वेतन लेवल-16 के स्थान पर वेतन लेवल-15 संशोधित किया जाना है। साथ ही विभागीय पदीय संरचनाओं / सेवा नियमावलियों में उपरोक्तानुसार जहां-जहां वेतन लेवल-15 एवं 16 अंकित है, के स्थान पर क्रमशः वेतन लेवल-14 एवं 15 समझा / पढ़ा जायेगा।
3-उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 की धारा-4 की उपधारा (5) के अधीन मोटर यान पर ग्रीन सेस हेतु निर्गत अधिसूचना में सेस की छूट को समाप्त किये जाने के संबंध में। तथा सी०एन०जी० वाहनों को देय ग्रीन
उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम एवं नियमावली, 2003 के अन्तर्गत वर्तमान में श्प्रवेश उपकरश् तथा ‘ग्रीन सेस‘ की दरों को सम्मिलित करते हुए उत्तराखण्ड राज्य में पंजीकृत एवं राज्य में प्रवेश करने वाले अन्य राज्य के व्यवसायिक एवं निजी वाहनों हेतु ग्रीन सेस की दरें निर्धारित की गयी हैं। हाईब्रिड अथवा सी०एन०जी० चालित परिवहन यानों को प्रोत्साहित किए जाने हेतु तत्समय देय मोटरयान कर से छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में अधिकांश हानि, सी०एन०जी० तथा सामान्य वाहन यथा ICE (Internal Combustion Engine) वाहन ही हैं, जिनके द्वारा संचालन के दौरान ईधन खपत के साथ-साथ बैटरी का भी उपयोग किया जाता है, जिससे तथा सी०एन०जी० प्रकार के यानों की लोकप्रियता में बढोत्तरी हुई है। वर्तमान में अधिकांश हाईब्रिड तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहन ही बाजार में प्रचलन में आ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहनों को मोटरयान कर से छूट प्रदान किए जाने पर राजस्व पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिसके दृष्टिगत उपरोक्त प्रकार के वाहनों को क्रमबद्ध तरीके से कराधान में लाया जाना आवश्यक है।
4- ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के सम्बन्ध में।
उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत सांख्यिकीय संवर्ग के अन्तर्गत सेवा में भर्ती और उसमें नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तों को विनियमित किये जाने के उद्देश्य से ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के प्रख्यापन का प्रस्ताव है।
5- प्रदेश में आम जनमानस को शीघ्र स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रदान करने और विभागीय स्तर पर विशेषज्ञ उपलब्ध न होने को दृष्टिगत रखते हुए औषधियों, सर्जिकल सामग्री, रसायन, उपकरण एवं इंप्लांटस की समयबद्ध एवं पारदर्शी अधिप्राप्ति हेतु उत्तराखण्ड मेडिकल सप्लाईज कॉर्पाेरेशन का गठन का प्रस्ताव मंत्रिमण्डल के विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है जिस पर मंत्रिमण्डल ने विभागीय प्रस्ताव पर सहमति की गयी है।
6- उत्तराखण्ड राज्य में एन०सी०डी०सी० (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) शाखा की स्थापना से राज्य में रोग निगरानी, प्रकोप महामारी की जांच और प्रकोप से निपटाने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता और दक्षता में और वृद्धि होगी। राज्य स्तर पर निदान सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा और प्रत्येक शाखा में बी०एस०एल०-3 स्तर की सुविधाए उपलब्ध होंगी। राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित शाखाएं मुख्यालय के साथ-साथ अन्य राज्य की शाखाओं और क्षेत्रीय केंद्रों से जुड़ी होंगी। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) नई दिल्ली, भारत सरकार को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में अवस्थित 65 एकड भूमि में से 01 एकड़ भूमि को 99 वर्ष की लीज (रू0 01) पर लीज पर दिये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी।
7-‘उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026‘ का प्रख्यापन।
कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की संरचना में अधीनस्थ कारागारों हेतु उप कारापाल के पद पर 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटे के पदों पर 90 प्रतिशत प्रधान बन्दीरक्षक एवं 10 प्रतिशत महिला बन्दीरक्षक से पदोन्नति कोटा निर्धारित किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। प्रस्तावित सेवा नियमावली विभागीय एवं कर्मचारी हित में प्रख्यापित की जानी आवश्यक है। अतः कार्मिको के ष्उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026ष् के प्रख्यापन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।
8-उत्तराखण्ड लोकायुक्त खोजबीन समिति (Search Committee) के कार्यकलापों का निर्धारण नियमावली, 2026
उत्तराखण्ड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 एवं लोकायुक्त अधिनियम (संशोधन) 2014 की धारा 4 की उपधारा (5) के प्रावधानों के अधीन लोकायुक्त संस्था के अध्यक्ष एवं सदस्य पद हेतु उपयुक्त नामों का पैनल तैयार कर चयन समिति को उपलब्ध कराये जाने हेतु उक्त अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट खोजबीन समिति की कार्यवधि, उसके सदस्यों को संदेय भत्ते तथा नामों के पैनल के चयन की रीति निर्धारित करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड लोकायुक्त खोजबीन समिति (Search Committee) के कार्यकलापों का निर्धारण नियमावली, 2026 तैयार किया जाना है।
9-‘उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026‘ के प्रख्यापन के सम्बन्ध में।
भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा दिनांकः 25 सितम्बर, 2024 को डिजिटल इंडिया लैण्ड रिकार्ड मार्डनाईजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के अंतर्गत नक्शा (शहरी आबादी क्षेत्रों का राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण) कार्यक्रम की शुरूआत की है, जिसका उद्देश्य शहरी भू-अभिलेखों के निर्माण और प्रबंधन में कांतिकारी बदलाव लाना है।
नक्शा कार्यक्रम अन्तर्गत स्वामित्व योजना की भांति शहरी भूमि अभिलेखों के लिए एक व्यापक और सटीक भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार करना है। हवाई और ग्राउण्ड सर्वेक्षणों को उन्नत जी०आई०एस० तकनीक के साथ एकीकृत करके, यह कार्यक्रम भूमि प्रशासन में दक्षता बढ़ायेगा, संपत्ति स्वामित्व अभिलेखों को सुव्यवस्थित करेगा और शहरी नियोजन को सुगम बनाने में उपयोगी होगा। सटीक भू-स्थानिक डेटा बेहतर निर्णय लेने, कुशल भूमि उपयोग नियोजन और संपत्ति लेनदेन को सुगम और निश्चित बनाने में भी उपयोगी एवं सहायक होगा।
अतएव प्रदेश के अन्य क्षेत्रों / सम्पूर्ण प्रदेश की राजस्व अभिलेखों में अभिलिखित आबादी क्षेत्रों में भूमि का आधुनिक विधि से सर्वेक्षण किये जाने हेतु ‘उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026‘ को प्रख्यापित किया जाना प्रस्तावित है।
10- उत्तराखण्ड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेन्ट कारपोरेशन लि० में कार्यरत तृतीय एवं चुतर्थ श्रेणी के कार्मिकों को अन्य विभागों में सेवा स्थानान्तरण पर भेजने के सम्बन्ध में।
उत्तराखण्ड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेन्ट कारपोरेशन लि० में अधिकांश तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों के कार्य की उपयोगिता सीजनल (माह फरवरी से माह मार्च एवं माह अगस्त से माह दिसम्बर तक) है। तृतीय एवं चुतर्थ श्रेणी के कार्मिकों को अन्य विभागों में सेवा स्थानान्तरण पर भेजने से निगम के बीज उत्पादन के लागत में कमी आयेगी, जिससें उत्तराखण्ड राज्य के कृषि विभाग एवं कृषकों को कम मूल्य पर गुणवत्तायुक्त बीज की आपूर्ति एवं अन्य राज्यों में अन्य बीज संस्थाओं से प्रतिस्पर्द्धा की जा सकेगी तथा बीज आपूर्ति में वृद्धि हो सकेगी। निगम के कार्मिकों के वेतन मद एवं प्रशासनिक व्यय में कमी होने से निगम को हो रहे प्रतिवर्ष घाटे को रोकने में मदद होगी। इसके कारण निगम में कार्यरत तृतीय श्रेणी के 22 एवं चतुर्थ श्रेणी के 63 कार्मिकों को जनपद ऊधमसिंहनगर एवं अन्य निकटस्थ जनपदों के विभिन्न विभागों में अधिकतम 10 वर्ष अथवा कार्मिकों की सेवानिवृत्ति की तिथि से 3 माह पूर्व, जो पहले हो, तक के लिये सेवा स्थानांतरण के आधार पर भेजा जाना प्रस्तावित है। कार्मिकों का सेवानिवृत्तिक लाभ निगम के द्वारा ही प्रदान किया जाएगा। सेवा स्थानांतरण पर अन्य विभागों में भेजे गए कार्मिकों को निगम में देय वेतन के आधार पर ही सम्बन्धित विभाग द्वारा वेतन देय होगा।
11- रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती से चयनित लाभार्थियों को काठबंगला में निर्मित आवासों का आबंटन विषयक।
उत्तराखण्ड राज्य के नगर निकायों में नदियों के किनारे अवैध रूप से बसी मलिन बस्तियों का सुव्यवस्थित और सुविचारित रूप से विस्थापन किये जाने के उद्देश्य से काठबंगला में 116 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। काठबंगला के निकट रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती में निवासरत् परिवारों में से, नगर निगम, देहरादून द्वारा चयनित लाभार्थियों को उक्त आवास आबंटित किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी गई है।
12- यू०यू०एस०डी०ए० के संरचनात्मक ढ़ाचे का पुनर्गठन किये जाने विषयक।
उत्तराखण्ड राज्य के नगर निकायों यथा-कोटद्वार, चम्पावत, टनकपुर, किच्छा, पिथौरागढ़, रूद्रपुर, काशीपुर एवं सितारगंज में ए०डी०बी० एवं ई०आई०बी० के माध्यम से वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत सीवरेज एवं पेयजल का कार्य किया जाना है तथा ऋषिकेश शहर में के०एफ०डब्लू० (KFW) के माध्यम से वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत राड़क निर्माण, सिवरेज, स्ट्रीट लाईट, सार्वजनिक परिवहन (ई बस), पेयजल, घाटों का सौन्दर्यकरण, एस०डब्लू०एम०, एल०डी०डी० स्क्रीन संबंधी कार्य किये जाने हैं। उक्त परियोजनाओं में किये जाने वाले कार्यों के सुचारू संचालन के दृष्टिगत यू०यू०एस०डी०ए० के संरचनात्मक ढ़ाचे का पुनर्गठन करते हुए कुल 94 अस्थाई (निःसंवर्गीय) पदों का सृजन किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी गई है।
13-अंत्योदय फाउंडेशन के पक्ष में Gift Deed किये जाने पर स्टाम्प शुल्क में छूट प्रदान किये जाने विषयक।
मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, कनाट प्लैस, नई दिल्ली द्वारा कैंसर रोगियों के लिये Hospice Care Center स्थापित किये जाने हेतु देवेंद्र नाथ सक्सेना और श्रीमती माधुरी सक्सेना की मौजा वीरभद्र (पुराना), ऋषिकेश स्थित सम्पत्ति को Antyodaya Foundation, जो कि एक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट है के पक्ष में Gift Deed किए जाने पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रश्नगत सम्पत्ति की लागत रू0 1,77,41,000/- है, जिस पर निर्धारित 5 प्रतिशत की दर रू0 8,87,050/- (₹ आठ लाख सत्तासी हजार पचास मान्त्र) की स्टाम्प ड्यूटी आकलित है। मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, नई दिल्ली के अनुरोध पर विचार किये जाने पर उक्त वर्णित / आकलित की धनराशि₹ 8,87,050/- की राजस्व हानि होगी।
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा-9 में श्शुल्क को घटाने, माफ करने या प्रशमन करने की शक्तिश् विषयक प्रावधान है। मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, नई दिल्ली द्वारा किये गये अनुरोध के कम में धर्मार्थ एवं जनकल्याणकारी कार्याे को प्रोत्साहित किये जाने के दृष्टिगत् उक्त वर्णित / आकलित स्टाम्प शुल्क की धनराशि ₹ 8,87,050/- से छूट प्रदान किये जाने के संबंध में माननीय मंत्रिमंडल द्वारा विचार किया जाना है।
14-उत्तराखण्ड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 की धारा-36 के प्राविधानानुसार उत्तरांचल विश्वविद्यालय जनपद देहरादून से सम्बन्धित या उससे आनुषांगिक विषयों का उपबन्ध एवं नियमन करने के लिए परिनियम के प्रख्यापन के संबंध में।
राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में स्थापित निजी विश्वविद्यालयों के कृत्यों को विनियमित किये जाने और संबंधित या आनुषांगिक विषयों की व्यवस्था करने हेतु उत्तराखण्ड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 (अधिनियम 02 वर्ष 2024) अधिनियमित है, जिसकी धारा-36 के प्राविधानानुसार संबंधित विश्वविद्यालय के परिनियमों को राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाना होता है।
उक्त के कम में उत्तरांचल विश्वविद्यालय परिनियम, 2026 का प्रख्यापन किया जा रहा है।
15- विषय-उपनल कार्मिकों के समान कार्य हेतु समान वेतन प्रदान किये जाने के संबंध में।
मंत्रिमण्डल द्वारा निम्नलिखित बिन्दुओं पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है-
(1) उपनल कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन का लाभ तीन चरणों में प्रदान किया जायेगा, जिसके प्रथम चरण में 01.01.2016 से पूर्व के नियोजित कार्मिकों के संबंध में वर्तमान में कार्यवाही की जा रही है। द्वितीय चरण में 01.01. 2016 से 12.11.2018 तक के नियोजित कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन हेतु विचार किया जायेगा जिस पर कार्यवाही दिनांक 09.11.2026 से तथा तृतीय चरण में 13.11.20218 से 15.10.2024 तक के नियोजित कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन की कार्यवाही 01 अप्रैल, 2027 से प्रारम्भ की जायेगी।
(2) उपनल के माध्यम से कार्याेजित कार्मिकों की सेवा में दिये गये कृत्रिम ब्रेक (व्यवधान) के दृष्टिगत सैनिक कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड शासन के शासनादेश दिनांक 20.02.2026 में उल्लिखित निरन्तर योजित शर्त / प्रतिबन्ध को विलोपित करते हुये दिनांक 01.01.2016 से पूर्व कार्य कर रहे उपनलकर्मी जो वर्तमान में भी कार्यरत हों, को शासनादेश दिनांक 03.02.2026 (यथासंशोधित) के अधीन न्यूनतम वेतन व महँगाई भते का लाभ प्रदान किया जायेगा।
(3) यदि किसी विभाग में सृजित / स्वीकृत पदों के सापेक्ष अतिरिक्त उपनल कार्मिक कार्य कर रहें हों तो उस स्थिति में समान कार्य समान वेतन के लाभ हेतु उपनल से नियुक्ति की तिथि का संज्ञान लेते हुये नियुक्ति तिथि (डेट ऑफ ज्वॉइनिंग) की वरीयता क्रम में कार्मिकों को सर्वप्रथम सृजित / स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियोजित माना जायेगा। शेष उपनल कार्मिकों को स्वीकृत पद के सापेक्ष कार्याेजित होने तक उसी विभाग / कार्यालय में संवर्ग के प्रारम्भिक (सीधी भर्ती के) पद के सापेक्ष वेतनमान के आधार पर कार्याेजित किया जा सकेगा, जिसके लिए वह न्यूनतम अर्हता धारित करते हों। पद उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिसंख्य पदों का सृजन / समायोजन करवाया जाएगा। इस प्रकार के समायोजन / अधिसंख्य पद सृजन पर त्वरित निर्णय लिए जाने हेतु शासन स्तर पर एक पृथक व्यवस्था (समिति) गठित की जायेगी।
(4) इस श्रेणी में आने वाले पूर्व उपनलकर्मी जिन्हें मा० उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में प्रत्यक्ष अनुबन्ध पर कार्याेजित किया जा रहा है, उन्हें वेतनमान का न्यूनतम एवं परिवर्तनीय महंगाई भत्ता का लाभ प्रदान किया जायेगा।
(5) मा० न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में सैनिक कल्याण विभाग द्वारा निर्गत आदेशों में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन रहते हुए विभिन्न निगमों, परिषदों एवं स्वायतशासी संस्थाओं द्वारा इस संबंध में स्वयं के स्तर पर निर्णय लिया
16- मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा संख्या-778/2025 ‘सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक समर्पित सेल की स्थापना की जायेगी‘ के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार के स्तर पर सेवामुक्त अग्निवीरों से संबंधित विषयों के लिए एक समर्पित प्रकोष्ठ स्थापित किए जाने तथा प्रकोष्ठ के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संविदा के आधार पर निम्नलिखित कुल-06 पदों के सृजन के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी है-
उप निदेशक – 01
सहायक निदेशक 02
कनिष्ठ सहायक 02
डाटा इंट्री ऑपरेटर 01
17-उत्तराखण्ड पावर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (UPCI) द्वारा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विश्वसनीय बेस-लोड बिजली की आपूर्ति हेतु राज्य सरकार को प्रस्तुत 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद के संबंध में न्यूनतम बोलीदाता (L1) अडानी पावर लिमिटेड से ₹5.746 प्रति यूनिट के कुल टैरिफ पर 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट (1234 मेगावाट अनुबंधित क्षमता) कोयला आधारित बिजली की खरीद को स्वीकृति प्रदान किये जाने एवं उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि० को अडानी पावर लिमिटेड के साथ बिजली आपूर्ति समझौते (PSA) एवं अन्य सम्बन्धित अभिलेखों पर हस्ताक्षर करने, आवश्यक शर्तों को पूरा करने और नियामक आयोग (UERC) से वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए अधिकृत किये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी है।
शहीद सैनिकों की स्मृति में गांवों में स्थापित होंगी मूर्तियां
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राज्य के शहीद सैनिकों की मूर्तियां उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य शहीदों की वीरता और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनके परिजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इस पहल से शहीद सैनिकों की स्मृतियां सदैव जीवंत रहेंगी और युवाओं को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलेगी।