रेस्टोरेंट में मनमानी करने वालो पर जेएसटी कसेगा तंज : यहां देखें

नई दिल्ली । अगर अब आप रेस्टोरेंट में खाना खाने जा रहे हों तो जीएसटी की घटी दरों का फायदा मिल सकता है। हालांकि हकीकत ये है कि जीएसटी की घटी दरों का आम ग्राहकों को फायदा नहीं मिल रहा है। 15 नवंबर से पहले रेस्टोरेंट जहां 18 फीसद की दर से जीएसटी वसूल रहे थे। लेकिन 15 नवंबर के बाद जीएसटी की दर घटकर पांच फीसद हो गई। ये बात अलग है कि रेस्टोरेंट मालिक नियमों का हवाला देकर ग्राहकों को बेवकूफ बना रहे हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट का हवाला देकर रेस्टोरेंट और फूड चेन चलाने वालों ने खाद्य पदार्थों की बेस प्राइस में बढ़ोतरी कर दी है।इसका अर्थ ये है कि18फीसद जीएसटी की दर से जो मूल्य आप दुकानदार को चुका रहे थे। ठीक वही मूल्य जीएसटी की दर पांच फीसद होने पर भी लोगों को चुकाना पड़ रहा है।रेस्टोरेंट और फूड चेन की खुली लूट के बाद सरकार हरकत में आई। अब जीएसटी परिषद ने रेस्टोरेंट मालिकों से कहा है कि वो 15 नवंबर 2017 से पहले और बाद की प्राइस लिस्ट को मुहैया कराएं।
इस संबंध में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि वो बहुत जल्द ही कीमतों की कटौती के बारे में विज्ञापन जारी करेंगे। राज्यों की जीएसटी अथॉरिटी रेस्टोरेंट मालिकों से फोन से जानकारी लेने के साथ ही सवालों की सूची भी भेजी है। रेस्टोरेंट मालिकों से कहा गया है कि वो पूरी जानकारी मुहैया कराएं ताकि ये पता लगाया जा सके कि इस तरह के गड़बड़झाला को किस तरह अंजाम दिया जा रहा है।
जीएसटी काउंसिल ने ये फैसला किया था कि रेस्टोरेंट (एसी या गैर एसी) बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के 18 फीसद जीएसटी की जगह पांच फीसद ही जीएसटी चार्ज कर सकेंगे। इसके साथ ही टेकअवे और होम डिलीवरी के लिए पांच फीसद फ्लैट जीएसटी लगाने का आदेश दिया गया। जीएसटी की दर घटाये जाने के बाद टाटा स्टारबक्श के प्रवक्ता का कहना है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा न मिलने की वजह से खाद्य पदार्थों की बेस प्राइस को बढ़ाया गया था। लेकिन ये कोशिश की जा रही है कि आम ग्राहकों को जीएसटी की घटी हुई दर का फायदा मिल सके। हालांकि रेस्टोरेंट और फूड चेन की मुनाफाखोरी को रोकने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने एंटी प्राफिटियरिंग अथॉरिटी को मंजूरी दी है।
जीएसटी की दरों को लेकर तमाम तरह के विरोधों के बीच जीएसटी काउंसिल ने कुछ 9 नवंबर को कुछ अहम फैसले किए, जिसमें 28 फीसद के दायरे में आने वाली तमाम सामानों (178) के टैक्स रेट घटा दिए गए। इसके साथ ही काउंसिल ने व्यापारियों को आगाह भी किया कि टैक्स रेट घटाए जाने के बाद कोई भी मैन्यूफैक्चरर एमआरपी में बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो रहा है। इस सवाल का जवाब तलाशना जरूरी है। सच ये है कि जीएसटी की दर में कमी होने के बाद भी रेस्टोरेंट मनमाना वसूली कर रहे है। इसे समझाने के लिए हम दो बिल की मदद लेंगे।
ये दोनों इनवॉयस मैक्डोनाल्ड फैमिली रेस्टोरेंट के हैं। पहले बिल का ऑर्डर नंबर 210 है जिसमें आप देख सकते हैं कि एमआरपी 120.34 रुपये है। इस कीमत पर सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी दोनों 9 फीसद की दर से लगाई गई है। इसका मतलब है कि टैक्स के तौर 21.66 रुपये वसूले गए हैं। इस तरह से आप के स्वाद की कीमत 142 रुपये हो गई है।
अब आप आर्डर नंबर 320 पर गौर करें, जिसमें जीएसटी की दर घटकर पांच फीसद हो चुकी है। लेकिन उत्पाद की एमआरपी 120.34 रुपये से बढ़कर 135.24 रुपए हो गई है। पांच फीसद की दर से टैक्स 6.76 रुपये बनता है। इसका मतलब है कि आप को आर्डर नंबर 210 में जितनी कीमत अदा करते थे ठीक उतनी ही कीमत यानि कि 142 रुपये टैक्स घटने के बाद भी अदा कर रहे हैं।
ऐसे में सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। इसके पीछे रेस्टोरेंट चलाने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट का हवाला देते हैं। जबकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन सामानों की जीएसटी दरों में कमी की गई है उनके बेस प्राइस में बढ़ोतरी नहीं की जा सकती है। इस संबंध में एक आयोग का गठन भी किया गया है। लेकिन हकीकत ये है कि धंधेबाजों का खेल जारी है।
जीएसटी काउंसिल के अब तक के फैसले
दो सौ से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दरें घटाई गईं।
ग्राहकों को राहत देने के लिए जीएसटी ‘राष्ट्रीय मुनाफाखोरी विरोधी प्राधिकरण’ के गठन को मंजूरी दी है।
जीएसटी की दरें घटने के बावजूद अगर किसी वस्तु या सेवा के दाम कम नहीं होते हैं तो यह प्राधिकरण कार्रवाई करेगा।
भारत सरकार में सचिव स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी इस प्राधिकरण का प्रमुख होगा, जबकि इसमें केंद्र और राज्यों से चार तकनीकी सदस्य होंगे।
हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने 215 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दरों में कटौती का फैसला किया है।
काउंसिल का फैसला 15 नवंबर से लागू हो गया है। काउंसिल ने 178 वस्तुओं पर जीएसटी की दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत की है।
इस तरह ग्राहक कर सकते हैं शिकायत
अगर किसी ग्राहक को लगता है कि जीएसटी दरों में कटौती का लाभ उसे नहीं मिल रहा है, तो वह स्क्रीनिंग कमेटी से शिकायत कर सकता है।
हालांकि, अगर यह मामला राष्ट्रीय स्तर का है, तो फिर सीधे इसकी शिकायत स्टैंडिंग कमेटी को भेजी जा सकती है।
अगर स्टैंडिंग कमेटी को मामला मुनाफाखोरी का लगता है, तो वह इसे विस्तृत जांच के लिए महानिदेशक सेफगार्डस के पास भेजेगी।
महानिदेशक सेफगार्डस मामले की जांच के बाद रिपोर्ट मुनाफाखोरी विरोधी प्राधिकरण को सौंपेगा।