इस सीजन 18.54 लाख श्रद्धालुओं में उमड़ा चारधाम दर्शन का सैलाब

ऋषिकेश। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा ने भी शीतकाल के लिए विराम ले लिया। वर्ष 2013 की आपदा के बाद इस वर्ष की चारधाम यात्रा आंकड़ों के लिहाज से सबसे सफल रही। इस दौरान चारधाम सहित प्रसिद्ध श्री हेमकुंड साहिब में कुल 18 लाख 53 हजार 900 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
इस वर्ष 29 अप्रैल को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। तीन मई को केदारनाथ धाम व छह मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा ने गति पकड़ ली थी। नतीजा, दूसरे सप्ताह ही ऋषिकेश में वाहनों का टोटा पड़ने लगा। लिहाजा प्रशासन को कुमाऊं मंडल सहित अन्य स्रोतों से भी चारधाम के लिए वाहनों का इंतजाम करना पड़ा। हालांकि, मानसून काल में यात्रा कुछ हल्की रही, लेकिन इसके बाद फिर उसने रफ्तार पकड़ ली।
2013 में केदार घाटी की आपदा के बाद चारधाम यात्रा पूरी तरह ठप पड़ गई थी। वर्ष 2014 व 2015 में भी स्थिति निराशाजनक ही रही। वर्ष 2016 में स्थिति कुछ संभली, मगर बीच में हुई बारिश के कारण यात्रा फिर लडख़ड़ा गई। हालांकि, इस वर्ष चारधाम दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या 13 लाख 35 हजार 239 पहुंच गई। लेकिन, इस वर्ष की यात्रा आंकड़ों के लिहाज से बेहतरीन रही।
राज्य सरकार ने आपदा से सबक लेते हुए त्रिलोक सिक्योरिटी सिस्टम को यात्रियों के फोटोमैट्रिक पंजीकरण की जिम्मेदारी सौंपी। इससे चारधाम यात्रा के काफी हद तक व्यवस्थित आंकड़े सामने आ रहे हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष त्रिलोक सिक्योरिटी सिस्टम के सभी 16 केंद्रों पर सात लाख 63 हजार 69 यात्रियों ने पंजीकरण कराया। जबकि, चारों धाम में कुल दर्शनार्थियों की संख्या 18 लाख 53 हजार 900 रही।