कुल्लू जिला में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या 206

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने आयोजित किया एड्स जागरुकता कार्यक्रम
कमलेश वर्मा(परी)
कुल्लू,12, दिसंबर। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने मंगलवार को बचत भवन में एचआईवी-एड्स पर एक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया। प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला एवं सत्र न्यायधीश राकेश चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों और जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों के अलावा पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वालंटियरों और स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायधीश ने कहा कि लाइलाज बीमारी एड्स को केवल आम लोगों की जागरुकता से ही रोका जा सकता है। समाज में हर स्तर पर इसके प्रति जागरुकता बहुत जरूरी है। इस अवसर पर जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी डा. राकेश ठाकुर ने एचआईवी-एड्स से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि इस समय हिमाचल प्रदेश में लगभग 9141 लोग एचआईवी वायरस से ग्रसित हैं और इनमें से 3531 लोगों को एड्स रोग हो चुका है। कुल्लू जिला में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या 206 है। डा. राकेश ने बताया कि एचआईवी मुख्यतः चार कारणों से फैलता है। इनमें असुरक्षित यौन संबंध सबसे प्रमुख कारण है। एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से यह वायरस उसके नवजात बच्चे तक पहुंच सकता है। संक्रमित सीरिंज-सूई के प्रयोग और रोगी को संक्रमित खून चढ़ाने से भी एचआईवी फैलता है। इसी एचआईवी वायरस के कारण एड्स रोग होता है। इस रोग से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति खत्म हो जाती है और अंततः उसकी मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में सभी गर्भवती महिलाओं का एचआईवी टेस्ट किया जाता है। अगर एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला की डिलीवरी अस्पताल में ही करवाई जाए और नवजात बच्चे को तुरंत दवाई दी जाएगी तो उसे एचआईवी संक्रमण की आशंका लगभग न के बराबर रह जाती है। इस अवसर पर डा. राकेश ने एड्स रोगियों और उनके अनाथ को मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं की जानकारी भी दी। कार्यक्रम के दौरान कुल्लू के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नरेश कुमार, लाहौल-स्पीति की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांता वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा और जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

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