दिल्ली में होगी सभी स्कूलों की रैंकिंग

नई दिल्ली।अगले साल से दिल्ली के पैरंट्स को हर सरकारी और प्राइवेट स्कूल के एजुकेशन स्टैंडर्ड और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में आसानी से जानकारी मिल सकेगी। इसके आधार पर वे अपने बच्चे के ऐडमिशन को लेकर फैसला कर सकेंगे। दिल्ली के हर प्राइवेट और सरकारी स्कूल को रैंकिंग दिए जाने का बड़ा फैसला किया गया है।
दिल्ली सरकार ने दिल्ली कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ऐक्ट (डीसीपीसीआर) को जिम्मेदारी दी है कि वह स्वतंत्र एजेंसियों से स्कूलों की रैंकिंग करवाए। दिल्ली स्टेट एजुकेशन ऐडवाइजरी काउंसिल की बुधवार को हुई मीटिंग में कई अहम फैसले लिए गए। डिप्टी सीएम और एजुकेशन मिनिस्टर मनीष सिसोदिया ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अभी स्कूलों का कोई परफॉर्मेंस ऑडिट नहीं है और ऐसा कोई ऑफिशल डॉक्युमेंट नहीं है, जिसके जरिए पैरंट्स को स्कूल के बारे में जरूरी जानकारियां मिल सकें। केवल बिल्डिंग देखकर क्वॉलिटी एजुकेशन के बारे में पता नहीं लग सकता। रैंकिंग के लिए जरूरी पैरामीटर तय किए जाएंगे। पढ़ाई का स्तर क्या है, इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है, मेंटेनेंस कैसी है, टीचर्स का स्टूडेंट्स के साथ कैसा बर्ताव रहता है, बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या-क्या इंतजाम किए गए हैं, इस तरह के तमाम पैरामीटर के आधार पर स्कूल की रैंकिंग तय होगी और ऑफिशल डेटा तैयार हो सकेगा। स्कूलों का कॉम्प्रिहेंसिव इवैल्यूएशन किया जाएगा।
स्कूल न जाने वाले बच्चों की होगी पहचान
डिप्टी सीएम ने बताया कि एजुकेशन बीट ऑफिसर्स हर मोहल्ले में जाकर पता लगाएंगे कि कौन से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। उनकी मदद से सरकार ऐसे बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाएगी। अलग- अलग सर्वे हुए हैं, लेकिन स्कूल न जाने वाले बच्चों को लेकर विस्तारपूर्ण डेटा नहीं मिल पाया है। इस मुहिम में आंगनबाड़ी वर्कर्स की भी मदद ली जाएगी और सरकार उन्हें अतिरिक्त भुगतान भी करेगी। दिल्ली सरकार की स्कूल मैनेजमेंट कमिटी में दो-दो सोशल वर्कर होते हैं। एमसीडी को भी कहा गया है कि वे अपने स्कूलों में एसएमसी को बेहतर बनाएं। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली सरकार और एमसीडी के स्कूलों की एसएमसी में करीब 2600 सोशल वर्कर हैं, जिन्हें एजुकेशन बीट ऑफिसर्स का दर्जा दिया जाएगा। हर एक बच्चे की मैपिंग होगी।
ताकि प्राइवेट स्कूलों में तालमेल बैठा सकें गरीब बच्चे
प्राइवेट स्कूलों के प्रिंसिपल और प्राइमरी विंग के टीचर्स की स्पेशल ट्रेनिंग होगी और उन्हें बताया जाएगा कि इकॉनमिकली वीकर सेक्शन (ईडब्ल्यूएस) कैटिगरी में ऐडमिशन पाने वाले बच्चों को कैसे ट्रीट किया जाए। सिसोदिया ने कहा कि पिछले दो साल में दिल्ली सरकार ने ईडब्ल्यूएस कैटिगरी के ऐडमिशन को पारदर्शी बनाया है। इनमें 31 हजार ऐडमिशन बिना किसी परेशानी के हुए हैं। देखने में आ रहा है कि इस कैटिगरी में ऐडमिशन पाने वाले बच्चों को दूसरे बच्चों के साथ तालमेल बिठाने में मुश्किल हो रही है। ईडब्ल्यूएस कैटिगरी में ऐडमिशन पाने वाले बच्चों के पैरंट्स भी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होते और वे अपने बच्चों को दूसरे पैरंट्स की तरह गाइड नहीं कर पाते।
किताब नहीं पढ़ पाते छठी क्लास के बच्चे
डिप्टी सीएम ने बताया कि दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों में 6 से 8वीं क्लास तक के स्टूडेंट्स के लिए चुनौती अभियान चलाया और रीडिंग मेला आयोजित किए। इसमें सामने आया कि छठी क्लास में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स अपनी किताबें नहीं पढ़ पाते। उसके बाद सरकार ने चुनौती अभियान के जरिए रीडिंग मेला आयोजित किए। अब दिल्ली सरकार और एमसीडी मिलकर प्राइमरी क्लासेज में भी यह प्रयोग करेगी ताकि स्टूडेंट्स अपनी किताबों को आसानी से पढ़ सकें।

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