आंध्र के बाद अब पश्चिम बंगाल में सीबीआई की नो इंट्री

आंध्र प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने राज्य में छापे मारने और जांच के लिए सीबीआई को दी गयी सामान्य सहमति को वापस ले लिया। यह जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई ने आधिकारिक सूत्र के हवाले से दी है। आंध्र प्रदेश में सीबीआई की सीधी दखलंदाजी पर पाबंदी से CBI ने इनकार किया है। सीबीआई ने कहा है कि अभी अधिसूचना नहीं मिली, जब मिलेगी तो उसी हिसाब से अगला कदम उठाएंगे। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र की बीजेपी नीत एनडीए सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह सीबीआई और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जैसे महत्वपूर्ण भारतीय संस्थानों को बर्बाद कर रही है।

इससे पहले आंध प्रदेश सरकार की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को राज्य में कानून के तहत शक्तियों के इस्तेमाल के लिए दी गई ‘सामान्य रजामंदी वापस ले ली। ऐसे में अब सीबीआई आंध्र प्रदेश की सीमाओं के भीतर किसी मामले में सीधे दखल नहीं दे सकती है। प्रधान सचिव (गृह) ए आर अनुराधा द्वारा आठ नवंबर को इस संबंध में जारी एक ‘गोपनीय सरकारी आदेश गुरुवार की रात ”लीक हो गया।

समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा के अनुसार ताजा सरकारी आदेश में कहा गया, ”दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 की धारा छह के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, सरकार दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को आंध प्रदेश राज्य में इस कानून के तहत शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल हेतु दी गई सामान्य रजामंदी वापस लेती है।

कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश सरकार के सीबीआई के संदर्भ में जारी आदेश को ‘गंभीर मुद्दा करार दिया और आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने इस केंद्रीय जांच एजेंसी को ‘प्राइवेट आर्मी बना दिया है। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ”ये बहुत ही गंभीर मुद्दा है आज का। जिन दो लोगों ने या ढाई लोगों ने सीबीआई को और ऐसी अन्य ऐजेंसी को अपनी प्राईवेट आर्मी बना दिया, इसका जवाब उन्हें देना चाहिए।

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