विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी किया घोषणापत्र

शिमला। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस घोषणापत्र में कांग्रेस ने कई वादे किए हैं। घोषणापत्र में कांग्रेस का ज्यादा तर जोर छात्रों पर रहा है और उन्हें लैपटॉप के साथ महीने में एक जीबी इंटरनेट डेटा मुफ्त देने का वादा किया है।
महिलाओं के लिए शहरों में खोले जाएंगे हॉस्टल
बुजुर्ग पेंशन भी बढ़ाई जाएगी और महिलाओं के लिए शहरों में हॉस्टल भी खोले जाएंगे। साथ ही दलित वर्ग के छात्रों की उच्च शिक्षा का भी प्रबंध किया जाएगा। वहीं, विधवाओं की बेटी की शादी के लिए 50 हज़ार से एक लाख रुपए तक दिया जाएगा।
छात्रों को एक जीबी डेटा के साथ फ्री लैपटॉप
कांग्रेस ने जहां 50 हजार मेधावी छात्रों को एक जीबी डेटा के साथ फ्री लैपटॉप देने की बात कही है, वहीं किसानों को भी बिना ब्याज के एक लाख रुपये तक का कर्ज देने का वादा किया है। साथ ही कहा गया है कि खेती को जंगली जानवरों से बचाने के लिए ठोस नीति अपनाई जाएगी।
बुज़ुर्गो की पेंशन 1300 से 1500 रुपए की जाएगी- कांग्रेस
घोषणा पत्र में बुजुर्गों की और ध्यान आकर्षित करते हुए भोषणा पर में कांग्रेस ने वादा किया है कि बुज़ुर्गो की पेंशन 1300 से 1500 रुपए की जाएगी। इतना ही नहीं बुजुर्गों की उम्र सीमा घटाकर 80 साल से 75 साल करेंगे।
ओआरओपी का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाएगी कांग्रेस
उन्होंने कहा कि पांच सालों के अंदर प्रदेश के हर गांव को सड़क से जोड़ा जाएगा। मनरेगा की मज़दूरी भी अपने संसाधनों से 350 रुपए की जाएगी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस केंद्र के सामने सैनिकों के लिए ओआरओपी का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाएगी।
मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर ने घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने पिछले वादों में से 95 फीसदी वादे पूरे कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी जरुरी कार्यक्रमों को वक्त से लागू किया जाएगा। कौल सिंह ने कहा कि हमारी सरकार में भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी की बारीकी से निगरानी की जाएगी।
हाल ही में बीजेपी ने अपना विजन डॉक्यूमेंट जारी किया था जो काफी मजबूत लग रहा था, लेकिन कांग्रेस का घोषणापत्र भी किसी रूप में कम नहीं है। प्रदेश में चुनाव प्रचार अपने चरम सिमा पर है और दोनों की बड़ी पार्टियों के नेता कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। अब ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि जनता किसके वादों पर यकीन करती है।