संविधान भारत के निर्माण का आधार है : योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर : गोरक्षपीठाधीश्वर और सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में कहा है कि हमारे पूर्व के पीठाधीश्वरों में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि व्यक्तिगत धर्म से राष्ट्रधर्म बड़ा है। यदि व्यक्ति का विकास चाहिए तो राष्ट्र का विकास उसकी अनिवार्य शर्त है। समर्थ भारत और समृद्धि की पूरी परिकल्पना भारत के संविधान में निहित है।

भारत की व्यवस्था संविधान से फतवे से नहीं
सीएम योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 49वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ महाराज की चतुर्थ पुण्यतिथि समारोह के दौरान आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत के अनेक मनीषियों और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने भारत का जो संविधान हमें दिया है, वह उसी भारत के निर्माण का आधार है, जैसा भारत हम चाहते हैं। इसलिए भारत और भारत की व्यवस्था भारत के संविधान से चलेगी किसी फतवे से नहीं।

उन्होंने कहा, ‘भारत की ऋषि परम्परा और भारत के संत परम्परा ने जिस भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की है, उसे हमें भारत के संविधान में देख सकते हैं। भारतीय संस्कृति में छुआछूत, ऊंचनीच जैसी किसी भेदभाव को स्थान प्राप्त नहीं है और यहीं बात भारत का संविधान भी कहता है। गोरखनाथ मंदिर में सभी पंथों के योगी-महात्मा रहते हैं। दोनों ब्रह्मलीन महंत जी महाराज ने हिन्दुत्व को ही गोरखनाथ मंदिर का वैचारिक अधिष्ठान बनाया।

भारत के बने रहने की कुंजी हिन्दू धर्म और संस्कृति
कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘महंत दिग्विजयनाथ महाराज और महंत अवैद्यनाथ महाराज ने राष्ट्रधर्म को सभी धर्मों से ऊपर माना। उन्होंने माना कि भारत को यदि भारत बने रहना है तो इसकी कुंजी सनातन हिन्दू धर्म एवं संस्कृति में है। महंत दिग्विजयनाथ महाराज आनन्दमठ की सन्यासी परम्परा के वे साक्षात प्रतिमूर्ति थे। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने का आरोप लगा। चौरीचौरा कांड में महन्त दिग्विजयनाथ जी को आरोपित किया गया। यह घटनायें इस बात की प्रमाण है कि गोरक्षपीठ ने उस सन्यासी परम्परा का अनुसरण किया, जो मानती रही है कि जो राष्ट्रधर्म ही हमारा धर्म है। राष्ट्र की रक्षा भी सन्यासी का प्रथम कर्तव्य है। गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वरों द्वारा प्रारम्भ की गई यह परम्परा आगे भी निरन्तर चलती रहेगी।

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