भाजपा का चुनावी गणित बिगाड़ सकती है वंशवाद परंपरा

25 सितंबर का भोपाल आए अमित शाह को शिवराज ने सर्वे रिपोर्ट सौंप दी है। इस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिन 70 विधानसभा सीटों पर भाजपा के लिए खतरा मंडरा रहा है उनमें-श्योपुर, सुबलगढ़, जौरा, भिंड, मेहगांव, ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर पूर्व, गुना, बीना, सुरखी, सागर, बंडा, टीकमगढ़, पृथ्वीपुर, चंदला, बिजावर, मलहरा, पथरिया, दमोह, हटा, गुनौर, रामपुर बघेलान, सेमरिया, त्योंथर, सिंगरौली, देवसर, धौहनी, जयसिंह नगर, जैतपुर, अनूपपुर, मानपुर, बरगी, सिहोरा, बिछिया, कटंगी, गोटेगांव, नरसिंहपुर, चौरई, सौंसर, मुलताई, घोड़ाडोंगरी, सिवनी मालवा, पिपरिया, उदयपुरा, विदिशा, शमशाबाद, बैरसिया, सुसनेर, शाजापुर, सोनकच्छ, बागली, पंधाना, नेपानगर, बड़वाह, जोबट, सरदारपुर, मनावर, धरमपुरी, बदनावर, देपालपुर, इंदौर-3, महिदपुर, तराना, घट्टिया उज्जैन दक्षिण, बडऩगर, सैलाना, गरोठ, मनासा और शामिल है।
नेता पुत्र भी उतरेंगे मैदान में
भाजपा के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने शाह को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें बताया गया कि उम्रदराज नेताओं की जगह उनके बेटा-बेटी, रिश्तेदारों को टिकट दिया जाए। हालांकि वंशवाद के आरोपों से बचने के लिए पार्टी एक ही परिवार के ज्यादा लोगों को टिकट नहीं देगी। संगठन सूत्रों ने बताया कि जो नेता खुद के साथ-साथ अपने बेटा-बेटी या रिश्तेदार के लिए टिकट मांगते हैं, उन्हें पार्टी की ओर से यह ऑफर किया जाएगा कि वे अपने बेटा-बेटी को चुनाव लड़वा दें और खुद संगठन को समय दें। पार्टी अगले चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री एवं गोविंदपुरा से विधायक बाबूलाल गौर का टिकट काटेगी, लेकिन इसके एवज में उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट दे सकती है। इसी तरह गोपाल भार्गव अपने बेटे अभिषेक भार्गव के लिए टिकट की मांग कर सकते हैं। अभिषेक ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान सागर से सांसद के टिकट की दावेदारी की थी।
इसी तरह बालाघाट से मंत्री बिसेन की बेटी मौसमी बिसेन ने भी सांसद का टिकट मांगा था। तब पार्टी ने वंशवाद के आरोपों से बचने के लिए नेता पुत्रों के अरमानों पर पानी फेर दिया था। कैलाश विजयवर्गीय अपने बेटे आकाश विजयवर्गीय को विधानसभा चुनाव लड़वा सकते हैं। इसी तरह अन्य उम्रदराज नेता भी अपने बेटे-बेटियों के लिए टिकट की मांग कर सकते हैं। ऐसे नेताओं के लिए पार्टी अलग लाइन तैयार कर रही है। क्योंकि ये ऐसे नेता हैं जो भाजपा का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं।
डैमेज कंट्रोल में जुटे शिवराज सिंह चौहान
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा को इस बार कई मोर्चों पर लड़ाई लडऩी होगी। प्रदेश में किसान सरकार से नाराज हैं, सवर्ण समाज भी पार्टी के फैसलों से खुश नहीं है और 15 साल से लगातार सत्ता में रहने के चलते एंटी-इंकम्बेंसी भी बड़ा कारण है। पार्टी सभी मोर्चों पर लडऩे के लिए रणनीति तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए हैं। एक और चीज जो राज्य में भाजपा को नुकसान पहुंचा रही है वो इसके खिलाफ विरोध करने वाले लोगों के प्रति इसके नेताओं की प्रतिक्रिया है। जबकि कांग्रेस अपने खिलाफ हो रहे इस तरह के विरोध की अनदेखी कर रही है और नाराज लोगों से सामान्य व्यवहार कर रही है। भाजपा के मंत्रियों के घरों के बाहर लोगों के प्रदर्शन के बाद कई जगह पर उनके खिलाफ पुलिस ने बल का प्रयोग किया। इससे भी लोग नाराज हैं और कह रहे हैं कि हमारे वोट आपके लिए नहीं हैं। ये तमाम घटनाक्रम भाजपा के लिए मध्यप्रदेश में खतरे की घंटी बजा रहे हैं। यही कारण है की पार्टी इसका मुकाबला करने के लिए सभी संभावित कदमों की तलाश कर रही है। निर्वाचन क्षेत्र को बदलना या फिर नए चेहरों को मौका देने की बात भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।