शीतकाल में केदारधाम की सुरक्षा में तैनात रहेगी फोर्स

रुद्रप्रयाग। भगवान केदारनाथ और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद होने के बाद अब मंदिरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने शुरू हो गये हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि शीतकाल में भी केदारनाथ में पुलिस फोर्स मौजूद रहेगी। ग्रीष्मकालीन यात्रा सीजन की तरह शीतकाल में भी बाबा की सुरक्षा होगी, लेकिन तुंगनाथ धाम में आज तक सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किये गये हैं। दरअसल, केदारनाथ, द्वितीय केदार मदमहेश्वर और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद होने के बाद इन क्षेत्रों में वीरानी छा जाती है। अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र होने के कारण यहां भारी मात्रा में बर्फ पड़ जाती है, जिस कारण यहां रहना आसान नहीं होता। शीतकाल में तो केदारनाथ में पल-पल मौसम बदलता है। कई फीट तक यहां बर्फ पड़ती है।वर्ष 2013 की आपदा के बाद से केदारनाथ में शीतकाल में पुनर्निर्माण के कार्य होने से मजदूरों की आवाजाही होती है। निम के मजदूर चार सालों से यहां जुटे हुये हैं। मजदूरों के बाद चार सालों से यहां पुलिस भी टिकी है। वरना आपदा से पहले कपाट बंद होते ही पुलिस भी नीचे आ जाती थी और गौरीकुंड से केदारनाथ की देख-रेख करती थी, लेकिन अब चार सालों से शीतकाल के दौरान पुलिस भी केदारनाथ में टिकी हुई है।पुराने अनुभवों को देखा जाये तो अभी तक शीतकाल में मन्दिर सुरक्षित नहीं है, जबकि अब केदारनाथ मंदिर के भीतर भी चांदी की दीवारें बन चुकी हैं। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा को लेकर चौकसी बरतनी होगी। वहीं, तृतीय केदारनाथ तुंगनाथ धाम की बात करें तो धाम की सुरक्षा हमेशा से भगवान भरोसे रहती है। कपाट बंद होने के बाद भी तुंगनाथ धाम में कोई भी आ-जा सकता है। लोगों की आवाजाही पर कोई रोक-टोक नहीं है।
पूर्व में मंदिर से कलश के साथ ही अन्य सामान भी चोरी हो चुका है, जिसका पता आजतक नहीं चल पाया। नवम्बर-दिसम्बर में चोपता तुंगनाथ में बर्फबारी होने के बाद अधिकांश लोग तुंगनाथ पहुंच जाते हैं, जो तुंगनाथ की सुरक्षा के लिये खतरा है। यदि आवाजाही पर रोक नहीं लगाई जाती है तो कोई भी यहां घुस सकता है। कुल मिलाकर देखा जाये तो केदारनाथ की तर्ज पर द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ की सुरक्षा को भी महत्व दिया जाना चाहिये। यह दोनों धाम भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक हैं।

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