कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और रुपये की गिरावट बढ़ा रही है आम जनता का भार

नई दिल्ली : कमजोर होते रुपये को राहत देने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक तेल उत्पादकों से भुगतान से जुड़ी शर्तों की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उछाल के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तेल उत्पादकों और उपभोक्ता देशों के बीच भागीदारी के संबंध पर जोर दिया है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल सके। पीएम मोदी ने तेल उत्पादक देशो से अपील की है की वे अपने निवेश योग्य अधिवेश को विकासशील देशों के तेल क्षेत्र में वाणिज्यिक लाभ के लिए लगाएं।
सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, उन्होंने पेमेंट टर्म्स की समीक्षा की गुजारिश की ताकि स्थानीय मुद्रा को अस्थायी राहत मिल सके। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत में इजाफा और रुपये के विनिमय मूल्य में गिरावट की वजह से उस पर दबाव बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अन्य बाजारों की तरह ही तेल बाजार में उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत साझेदारी की वकालत की। सूत्रों ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत जैसे बड़े तेल उपभोक्ता देशों की चिंताएं बढ़ी हैं क्योंकि इससे रिटेल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम बहुत ज्यादा हो चुके हैं।
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने CEOs से यह भी पूछा कि इस तरह की पिछली बैठकों में उनकी तरफ से की गईं सभी सिफारिशों को लागू करने के बावजूद भारत में तेल और गैस खोज व उत्पादन से जुड़े नए निवेश क्यों नहीं आ रहे हैं।
कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए ऑइल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों से भारत गंभीर चिंताओं का सामना कर रहा है। ऑइल मिनिस्टर ने कहा कि पिछले एक साल में कच्चे तेल की कीमत डॉलर के लिहाज से 50 प्रतिशत बढ़ चुकी है, जबकि रुपये के लिहाज से इसमें 70 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।