रूआ पंचायत में दी विभिन्न कानूनों की जानकारी

कमलेश वर्मा(परी),कुल्लू,11 दिसंबर। पत्नी, बच्चों व माता-पिता के खर्चे व भरण-पोषण के अधिकार अधिनियम के तहत दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 से 128 तक सामाजिक समस्या के निवरण के लिए इस कानून का प्रावधान किया गया है। इस कानून के अधीन पत्नी, बच्चों के माता न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत में या पंचायत में मामला दायर कर सकते हैं। यह जानकारी सीजेएम एवं उपमंडल स्तरीय विधिक सेवा समिति मनाली के अध्यक्ष प्रशांत सिंह नेगी ने ग्राम पंचायत बुरूआ के तहत बुरूआ में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति व जनजाति अधिनियम के तहत इस वर्ग के व्यक्तियों के विरूद्ध उत्पीड़न करने वाला व्यक्ति कम से कम छह माह तथा अधिकतम 5 वर्ष तक के कारावास की सजा और जुर्माना से दंडनीय होगा। उन्होंने बच्चों को उनके मौलिक अधिकार व कर्तव्यों से अवगत करवाया। शिविर में घरेलू हिंसा, बाल विवाह, बाल मजदूरी, मनरेगा कानून के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अधिक अधिक संख्या में लोक अदालतों में भाग लें। लोक अदालतों में भाग लेने से समय व धन दोनों की ही बचत होती है। अधिवक्ता चूड़ामणि ठाकुर ने मोटर वाहन अधिनियम, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार के बारे में भी लोगों को बताया गया। ग्राम पंचायत प्रधान कृष्ण ठाकुर ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखें।

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