एमपी विधानसभा चुनाव : क्या है राकेश-सुहास की डायरी में?

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने कई स्तर पर टिकट के लिए चुनावी सर्वे कराया है, लेकिन इस बार टिकट का चयन राकेश सिंह और सुहास भगत की डायरी में दर्ज दावेदारों के नामों में से होगा। राकेश सिंह ने पार्टी के जमीनी नेताओं से फीडबैक लेकर सभी विधानसभा सीटों से टिकट के दावेदारों की लिस्ट तैयार की है। इसी के आधार पर टिकटों का चयन होगा। उनके पास हर विधानसभा क्षेत्र से 2 से 3 दावेदारों की कुंडली है। हाल ही में उन्होंने सभी जिलों के पूर्व एवं वर्तमान पदाधिकारियों से सामूहिक एवं वन-टू-वन चर्चा कर टिकट के दावेदारों के नाम जुटाए हैं और जीत की संभावना पर फीडबैक लिया है। राकेश सिंह ने प्रदेश के सभी जिलों के जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष, जिले के प्रदेश एवं राष्ट्रीय पदाधिकारी समेत अन्य नेताओं को अलग-अलग दिन चर्चा के लिए समय बुलाया। एक दिन में राकेश सिंह ने 5 से 6 जिलों के नेताओं से सामूहिक एवं वन-टू-वन चर्चा कर जमीनी फीडबैक लिया है। खास बात यह है कि राकेश सिंह ने हर नेता के सुझाव और खामी को नोट किया है। उन्होंने जिलों के नेताओं से मौजूद विधायकों का रिपोर्ट कार्ड एवं अगले चुनाव के लिए जीत के प्रबल दावेदारों के नाम भी मांगे। जिलों से मिले फीडबैक के आधार पर राकेश सिंह ने हर विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिसमें पार्टी के मौजूदा विधायकों की परफार्मेंस रिपोर्ट भी है।

शिवराज की रिपोर्ट में ७० विधायक कमजोर…
भाजपा सूत्रों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान की निजी रिपोर्ट को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाएगा। इसके अनुसार करीब 70 विधायकों के खिलाफ माहौल हैं। उनकी जीत संशय में है। ऐसे में उनके टिकट बदले जा सकते हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश संगठन, शाह की कोर टीम और राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री की सर्वे रिपोर्ट भी महत्व रखती है। आखिर उसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इनपुट होगा। जिसके बिना फिलहाल तो मध्य प्रदेश में भाजपा को मुश्किल ही होगी। सूत्रों का कहना है कि उम्रदराज नेताओं को टिकट नहीं दिया जाएगा। उनके स्थान पर उनके बेटे, बहू या किसी अन्य रिश्तेदार को टिकट दिया जा सकता है। भाजपा की सबसे बड़ी चिंता होगी बागियों की, क्योंकि जिसका भी टिकट कटा वह बगावत कर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के लिए परेशानी खड़ा कर सकता है। जो सर्वे आ रहे हैं, वह विरोधाभासी नतीजे दे रहे हैं, जिससे पार्टी को सही उम्मीदवार को चुनने में दिक्कत आ रही है।
मप्र भाजपा में टिकट वितरण के लिए सबसे अधिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सर्वे रिपोर्ट को महत्व दिया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों का सर्वे भी किया और कराया है। बताया जाता है कि सर्वे के बाद मुख्यमंत्री ने जो रिपोर्ट तैयार करवाई है उसके अनुसार 70 विधायक कमजोर बताएं गए हैं। गौरतलब है कि संघ और भाजपा हाईकमान द्वारा मप्र की जमीनी हकीकत टटोलने के लिए मई-जून में जो सर्वे कराए गए हैं, उसमें भाजपा की हालत बेहद खराब बताई जाती रही है। यदि पार्टी माजूदा 165 विधायकों के भरोसे फिर से 2018 का विधानसभा चुनाव लड़ती है तो 100 से ज्यादा विधायकों को हार का सामना करना पड़ सकता है। इन तमाम रिपोर्ट के बाद जमीनी हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद जनआशीर्वाद यात्रा पर निकले। 25 सितंबर को मुख्यमंत्री ने अपनी सर्वे रिपोर्ट का आकलन करवाया तो यह तथ्य सामने आया कि 70 विधायक तो ऐसे हैं जिन पर हार का खतरा मंडरा रहा है।

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