नवरात्रि में सभी दिन होते हैं महत्त्वपूर्ण : इंदुभवानंद

सुदिप्तो चटर्जी : रायपुर के बोरियाकला स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम में नवरात्रि के चतुर्थी के दिन भगवती की माँ कूष्मांडा के रूप में वैदिक मंत्रोच्चारण से पूजन आश्रम प्रमुख डॉ इंदुभवानन्द ब्रह्मचारी ने सम्पन्न किया। रात्रिकालीन निशा पूजन अधिक महत्त्वपूर्ण होता है यह कहना है ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानंद जी महाराज का। रात्रिकालीन विशेष पूजन में भगवती का 1008 कमल के पुष्प से अर्चन किया जाता है तथा शक्ति की आराधना की जाती है क्यों कि इस समय शक्ति युवा अवस्था की ओर अग्रसर होता है और रात्रि कालीन पूजन में जो उपासना करते हैं उन्हें इसकी अनुभूति होती है। जिस भी मंदिर में मणि की विग्रह होती है वह परिसर में भक्ति का एक अलग ही भाव उत्पन्न होते रहता है।

आज के सायंकालीन पूजन में आचार्य धर्मेंद्र, एमएल पांडेय, सुमिता ब्रह्मा, ज्योति नायर, तारिणी तिवारी, नरसिंह चंद्राकर, सोनू चंद्राकर, मयंका पांडेय, प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी व अनेक भक्तगण उपस्थित हुए तथा पूजा में सम्मिलित होकर भगवती को पुष्पांजलि अर्पित किए। इसके पश्चात ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द जी महाराज ने 108 दीपों से महाआरती किये और भगवती को भोग लगाये। ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द ने सभी भक्तों से आग्रह किया कि वे पूरे भक्ति से सपरिवार शक्ति की उपासना करें और रोजाना पूजन में अवश्य सम्मिलित होंवे।

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