सेना को हाईटेक बनाने के लिए आईआईटी में खुला सेंटर

नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली के रिसर्चर अब डिफेंस साइंस पर बड़े स्तर पर काम करेंगे। इसके लिए इंस्टिट्यूट में जॉइंट अडवांस्ड टेक्नॉलजी सेंटर ऐक्टिव हो चुका है। पहले फेज में यहां 23 प्रॉजेक्ट पर काम होगा। इस सेंटर में आईआईटी स्टूडेंट्स, फैकल्टी और डीआरडीओ के साइंटिस्ट मिलकर काम करेंगे। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (आईआईटी) दिल्ली और डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) मिलकर जॉइंट अडवांस्ड टेक्नॉलजी सेंटर (JATC) चलाएंगे। इस सेंटर में डीआरडीओ की जरूरतों के हिसाब से नई टेक्नॉलजी पर रिसर्च का काम होगा। ऑर्गनाइजेशन फैकल्टी और स्टूडेंट्स की स्किल्स को सही दिशा में लगाएगा, ताकि देश को डिफेंस फील्ड में बढ़िया टेक्नॉलजी और मदद मिल सके।
यह सेंटर देश के ठंडे इलाकों में सेना के जवानों के लिए कपड़ों की अडवांस तकनीक से लेकर धमाकों में टिके रहने वाले स्ट्रक्चर, ब्लास्ट विरोधी मोबाइल स्ट्रक्चर, ऐंटी-माइन बूट, हल्के बुलेट प्रूफ जैकिट वगैरह बनाने के लिए अडवांस टेक्नॉलजी लाने का काम करेगा। आईआईटी के डायरेक्टर प्रो.वी. रामगोपाल राव ने बताया कि यह सेंटर सेना की जरूरतों के हिसाब से इनोवेटिव टेक्नॉलजी लाएगा। शुरुआत में रिसर्च के लिए पांच फील्ड पर फोकस है – पहला, अडवांस्ड बलिस्टिक्स, स्पेशल स्ट्रक्चर और प्रोटेक्शन टेक्नॉलजी, दूसराअडवांस्ड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक डिवाइस और टेराहर्ट्ज टेक्नॉलजी, तीसरा स्मार्ट और इंटेलिजेंट टेक्सटाइल, चौथा ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस और ब्रेन-मशीन इंटेलिजेंस और पांचवां प्लासमोनिक्स और क्वांटम फोटोनिक्स।
सेंटर पहले फेज में 23 प्रोजेक्ट पर काम करेगा। कई प्रोजेक्ट में काम शुरू हो चुका है। सेंटर के डायरेक्टर एमएच रहमान ने बताया, 160 करोड़ रुपये की ग्रांट इनके लिए जारी हो चुकी है। सेंटर में आईआईटी दिल्ली के 75 टीचर, 100 पीएचडी स्टूडेंट्स काम करेंगे। इनके अलावा डीआरडीओ से 50 साइंटिस्ट इस सेंटर की लैब में गाइडेंस देंगे। पिछले साल नवंबर में आईआईटी और डीआरडीओ ने इस सेंटर को शुरू करने के लिए एमओयू साइन किया था।

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