2005 के बाद वन विभाग के ढांचे का पुनर्गठन

देहरादून। वन विभाग का ढांचा 2005 में तैयार किया गया था। लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद प्रदेश में पहली बार वन महकमे के ढांचे का पुनर्गठन किया जाएगा। इसमें फील्ड स्टाफ यानी फॉरेस्ट गार्ड से लेकर सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) पदों को शामिल कर वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। इस दौरान विधानसभा में वन फील्ड अधिकारी-कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधियों और विभागीय उच्चाधिकारियों भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को कार्मिक एवं वित्त विभाग की सहमति से कार्मिक ढांचे के पुनर्गठन का प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए गए हैं। गुजरे 12 सालों में न सिर्फ परिस्थितियां बदली, बल्कि विभागीय कार्यों में भी इजाफा हुआ है। वन भूमि हस्तांतरण, ऑल वेदर रोड, जायका प्रोजेक्ट, इको टूरिज्म समेत अन्य परियोजनाओं का कार्य बढ़ने से उसे कार्मिकों की जरूरत है। मुठभेड़ में शहीद हुए कर्मचारियों का भी उठा सवाल वन मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि फील्ड स्टाफ के ढांचे के पुनर्गठन का प्रस्ताव कैबिनेट से पास होना है। इसके लिए जल्द ही मसले को कैबिनेट में जाने के निर्देश दिए गए हैं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि बदली परिस्थतियों में वनकर्मियों को शिकारियों-तस्करों से लोहा लेना पड़ता है। कई कर्मचारी अब तक मुठभेड़ में शहीद हो चुके हैं। यही नहीं, ड्यूटी के दौरान वन्यजीवों के हमलों में भी कार्मिक मारे गए हैं। इन कार्मिकों के परिजनों को भी पुलिस की भांति मुआवजा राशि मुहैया कराने के मद्देनजर प्रस्ताव कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इस सबका असर कार्मिकों की पदोन्नति पर भी पड़ रहा है। इसे देखते हुए फील्ड स्टाफ के ढांचे के पुनर्गठन की बात अक्सर उठती रही है। इस कड़ी में वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की सोमवार को उच्चाधिकारियों और फील्ड कर्मियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में भी यह मसला प्रमुखता से उठा।

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