शीतमरुस्थल जनजातीय ज़िला लाहुल स्पीति को जोड़ने वाला रोहतांग दर्रा बन्द

-ताज़ा बर्फबारी के कारण ज़िला का पूरे विश्व से कटा संपर्क
-बर्फ के कारावास में कैद हुए जनजातीय लोग
-15 नवबंर से औपचारिक तौर पर भी वाहनों के लिए बन्द कर दिया गया है रोहतांग दर्रा
-पूरे जिला में बिछी बर्फ की सफेद चांदी
कमलेश वर्मा (परी)
कुल्लू,17 नवबंर। शीतमरुस्थल जनजातीय ज़िला लाहुल स्पीति को जोड़ने वाला रोहतांग दर्रा शुक्रवार को ताजा बर्फबारी के कारण बन्द कर दिया गया है।13,050 फुट की ऊंचाई पर स्थित रोहतांग दर्रे में ताजा बर्फबारी होने के कारण ज़िला लाहुल स्पीति का पूरे विश्व से संपर्क पूरी तरह से कट गया है। हालांकि वहीं, उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने जानकारी दी है कि बर्फबारी और अधिक ठंड के कारण रोहतांग दर्रा भी पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है तथा दर्रे के दोनों ओर मढ़ी और कोकसर में बचाव चैकियां स्थापित कर दी गई हैं। उन्होंने यात्रियों से इन चैकियों में पंजीकरण के बाद ही रोहतांग आर-पार करने की अपील की।
उधर,शुक्रवार शाम खबर लिखे जाने तक रोहतांग दर्रे पर करीब एक फुट बर्फ गिर चुकी थी। वहीं, लाहुल स्पीति के कई क्षेत्रों में भी बर्फ की चांदी बिछ गई है।उधर, 15 नवंबर के बाद रोहतांग दर्रें को वाहनों की आवाजाही के लिए भी औपचारिक तौर पर बंद कर दिया गया है। दर्रे के बन्द होंने से अब पूरे विश्व का जनजातीय ज़िला लाहुल स्पीति से पूरी तरह से संपर्क कट गया है जिससे लाहुल स्पीति, चंबा, पांगी के लोग बर्फ के कारावास में कैद हो गए हैं। वहीं, ज़िला के मुलिंग,कोकसर, सिस्सू, गोंधला, गोशाल, केलांग, दारचा, जिस्पा व चंबा के पांगी, किलाड़ सहित समूची पटन घाटी में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। इसके अलावा जिला मुख्यालय केलांग का तापमान भी शून्य से नीचे माइनस पहुंच गया है। वहीं मौसम के करवट बदलने से लाहौल के किसानों-बागवानों ने राहत की सांस ली है। सीज़न की पहली बर्फबारी से लोगों के चेहरे खिल गए हैं । इसके साथ ही लोगों को सर्दियों की चिंता भी सताने लगी हैं ।
वहीं भारी बर्फबारी के दौरान यहां टैक्सी सेवाएं भी बंद रहती हैं जिसके चलते लाहौल-स्पीति में इन दिनों लोग सर्दियों की तैयारियों में जुट गए हैं। जिला लाहौल स्पीति छह महीने तक बर्फ की कैद में रहता है, जिस कारण लाहौल देश-दुनिया से छह महीने तक पूरी तरह से कट जाता है। इन्हीं 6 महीनों से निपटने के लिए लाहौल वासी और सरकारी विभागों ने अभी से तैयारियां करनी शुरु कर दी हैं। लाहौल निवासी सर्दियों से बचने के लिए निचले इलाके कुल्लू व मनाली आ जाते हैं। उनका कहना है कि केलांग में छह महीने तक टिक पाना बहुत ही कठिन होता है। केलांग निवासियों ने कहा कि उन्हें स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती है इसलिए वह निचले इलाकों का रुख करते हैं। ऊंचाई के कारण लाहौल-स्पीति में सर्दियों में बहुत ज्यादा ठंड होती है। वहीं गर्मियों में मौसम बहुत सुहाना हो जाता है। ठंड में बिजली व यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है जिस कारण यहां पर्यटन भी प्रभावित हो जाता है। हालांकि स्पीति पूरे साल शिमला से काजा (पुराने भारत-तिब्ब्त) के रास्ते से जुड़ा रहता है। उधर लाहौल जून तक पूरी तरह कट जाता है। वहीं दिसंबर से अप्रैल के बीच साप्ताहिक हेलिकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध रहती हैं लेकिन बर्फबारी ज्यादा होने पर ये हेलीकॉप्टर सेवाएं भी बन्द हो जाती हैं जिससे यहां के बाशिन्दे सर्दियों में बर्फ के कारावास में कैद हो जाते हैं।

बर्फबारी और अधिक ठंड के कारण रोहतांग दर्रा भी पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है तथा दर्रे के दोनों ओर मढ़ी और कोकसर में बचाव चैकियां स्थापित कर दी गई हैं। यात्री इन चैकियों में पंजीकरण के बाद ही रोहतांग आर-पार करें।
———————————————-यूनुस, उपायुक्त कुल्लू

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