पांच फीसदी वोट के पास सत्ता की चाबी

शिमला। छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में सत्ता की चाबी महज चार से पांच फीसदी मतों के पास है। यानी हिमाचल में चार से पांच फीसदी वोट का स्विंग ही सत्ता को उलट-पलट देता है। यही कारण है कि कांग्रेस हो या भाजपा, विगत 32 साल से हिमाचल में कोई भी दल सरकार को रिपीट नहीं कर पाया है।हिमाचल में हर चुनाव में सत्तारूढ़ दल मिशन रिपीट का दावा करता आया है। इस चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी सरकार के रिपीट होने का दावा कर रही है। हिमाचल प्रदेश में अमूमन चार से पांच प्रतिशत वोट ही सत्ता का फैसला करते हैं। इस ट्रेंड का अपवाद एकमात्र 1993 का चुनाव है, जहां ये गणित नहीं चला था। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 42.8 फीसदी वोट लेकर सरकार बनाई थी। इस चुनाव में भाजपा मिशन फिफ्टी प्लस यानी 68 में से पचास सीटें या इससे अधिक जीतने के लिए जोर लगा रही है तो कांग्रेस की नजर पिछले चुनाव के मत प्रतिशत को दोहराने पर है।
विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा को 39 फीसदी मत मिले थे। यानी करीब चार फीसदी मतों के अंतर यानी स्विंग ने ही सत्ता का फैसला किया। वहीं, इससे पूर्व यानी वर्ष 2007 के चुनाव में भाजपा को 43.78 फीसदी मत पड़े और कांग्रेस ने 38.90 फीसदी मत हासिल किए। इस तरह वर्ष 2007 के चुनाव में भी जीत-हार का अंतर पांच फीसदी से जरा सा अधिक था।